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Tomato Crop Care Tips: जून-जुलाई की झुलसाने वाली गर्मी और लू के थपेड़े टमाटर की फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं. बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम में दोपहर के वक्त सिंचाई करने से पौधों की जड़ें सड़ सकती हैं. फसल को सूखने और फलों को दागदार होने से बचाने के लिए सुबह-शाम पानी देने, पुआल से मल्चिंग करने, और विंडब्रेकर के रूप में मक्का-बाजरा लगाने जैसे उपाय बेहद कारगर साबित होते हैं. आइए जानते हैं कि इस तपती धूप में टमाटर की बंपर पैदावार बनाए रखने के लिए किन खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है.
जिला उद्यान अधिकारी डॉ पुनीत कुमार पाठक ने बताया कि तेज धूप और दोपहर की गर्मी में टमाटर की फसल को पानी देने से बचना चाहिए. इस मौसम में हमेशा सुबह जल्दी या फिर शाम के ढलते समय ही सिंचाई करें. दोपहर में पानी देने से मिट्टी गर्म हो जाती है, जिससे जड़ें सड़ सकती हैं. सही समय पर दी गई नमी पौधों को लू के थपेड़ों से लड़ने की ताकत देती है और उन्हें सूखने से बचाती है.

गर्मियों में खेतों से पानी का वाष्पीकरण बहुत तेजी से होता है. इसे रोकने के लिए पौधों के चारों ओर सूखी घास, पुआल या गन्ने की पत्तियों से मल्चिंग जरूर करें. मल्चिंग करने से मिट्टी का तापमान नियंत्रित रहता है और लंबे समय तक नमी बनी रहती है. इससे न केवल पानी की बचत होती है, बल्कि टमाटर के पौधों की जड़ें भी सुरक्षित रहती हैं.

तेज और सीधी धूप टमाटर के फूलों और फलों को झुलसा देती है, जिससे उनकी गुणवत्ता खराब हो जाती है. खेत के ऊपर या चारों ओर 50 प्रतिशत वाली ग्रीन नेट लगाकर पौधों को सीधी धूप से बचाया जा सकता है. नेट छनकर आने वाली रोशनी पौधे को मिलती है, जिससे खेत का तापमान सामान्य बना रहता है और फसल हरी-भरी दिखती है.
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तेज और गर्म हवाएं यानी लू पौधों की नमी को सोख लेती हैं. इससे बचने के लिए टमाटर के खेत के चारों ओर ऊंची बढ़ने वाली फसलें जैसे बाजरा, मक्का या ज्वार बोनी चाहिए. ये फसलें एक प्राकृतिक दीवार या विंडब्रेकर की तरह काम करती हैं. यह हरा प्राकृतिक घेरा गर्म थपेड़ों की रफ्तार को धीमा कर टमाटर के पौधों को सीधे नुकसान से सुरक्षित रखता है.

गर्मी के तनाव से निपटने के लिए पौधों को अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है. इस मौसम में भारी रासायनिक खादों के बजाय जैविक खाद, कंपोस्ट और तरल कचरे का उपयोग करें. पोटेशियम युक्त उर्वरकों का छिड़काव पौधों की पानी सोखने की क्षमता को बढ़ाता है. ध्यान रहे कि तेज दोपहर में किसी भी तरह के खाद या कीटनाशक के छिड़काव से पूरी तरह बचना चाहिए.

तेज धूप के कारण टमाटर के फलों पर सफेद धब्बे पड़ जाते हैं, जिसे ‘सनस्कैल्ड’ कहते हैं. इससे बचने के लिए पौधों में पर्याप्त पत्तियां होनी चाहिए जो फलों को ढक सकें. इसके अलावा, फलों को सीधे जमीन के संपर्क में आने से बचाएं. अगर फल जमीन छुएंगे तो गर्मी से गल सकते हैं. इसलिए पौधों को बांस या लकड़ियों के सहारे बांधकर ऊपर उठाएं.

गर्मी के मौसम में थ्रिप्स, सफेद मक्खी और मकड़ी जैसे कीटों का प्रकोप तेजी से बढ़ता है. इन पर नियंत्रण पाने के लिए नीम के तेल या हल्के जैविक कीटनाशकों का नियमित छिड़काव करें. रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग केवल शाम के समय ही करें, ताकि मित्र कीटों को नुकसान न पहुंचे और दवा का असर भी पौधों पर लंबे समय तक बना रहे.

गर्मियों में टमाटर के पूरी तरह लाल होने का इंतजार खेत में न करें. जैसे ही फल हल्का गुलाबी या सिंदूरी रंग लेने लगे, उसकी तुड़ाई कर लें. इसके बाद उन्हें किसी ठंडे और छायादार स्थान पर रखें. ऐसा करने से फल ट्रांसपोर्ट के दौरान खराब नहीं होते और बाजार तक सुरक्षित पहुंचते हैं, जिससे किसानों को अपनी फसल का उचित और बेहतर दाम मिल पाता है.