उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि ग्राम प्रधानों को प्रशासक बने रहने की इजाजत नहीं दी जा सकती. अदालत ने कहा कि प्रशासक नियुक्त करना डिवीजन बेंच के आदेश का उल्लंघन है, जोकि अदालत की अवमानना की श्रेणी में आता है.
याचिकाकर्ता अरविंद राठौर की याचिका पर सुनवाई करते सिंगल बेंच में जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने यह टिप्पणी की है. हालांकि कोर्ट ने अभी किसी तरह की कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई है. कोर्ट ने सरकार को अंतिम अवसर देते हुए ओबीसी आयोग की रिपोर्ट को विस्तृत हलफनामे के जरिए रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश दिया है. इस मामले में अब अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी.
क्या है याचिका ?
याचिकाकर्ता अरविंद राठौर ने हाईकोर्ट में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर राज्य सरकार के ग्राम प्रधानों को प्रशासन बनाने के फैसले को चुनौती दी थी. उन्होंने याचिका में मांग की है कि ग्राम प्रधानों को हटकर तुरंत त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराएं जाएं. प्रदेश में पिछले महीने 26 मई को पंचायतों का कार्यकाल खत्म हो चुका है. इसके बाद यूपी सरकार ने एक आदेश जारी कर मौजूदा ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त कर दिया था.
कोर्ट की टिप्पणी
याचिका पर सुनवाई करते हुए सिंगल बेंच ने कहा कि ग्राम प्रधानों को प्रशासक बने रहने की इजाजत नहीं दी जा सकती. इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि यदि कोई ओबीसी आयोग गठित किया गया है तो उसकी पूरी जानकारी, रिपोर्ट और चुनाव की समय-सीमा स्पष्ट रूप में हलफनामे में दाखिल करें. इस मामले में अब अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी.
अभी कोर्ट ने सरकार के फैसले पर कोई रोक नहीं लगाई है, लेकिन जिस तरह से कोर्ट की टिप्पणी है उसमें मामला फंसता नजर आ रहा है. अब 13 जुलाई को सरकार क्या हलफनामा दाखिल करती है, उसी पर सबकी नजरें टिकी हैं.