उत्तराखंड में लंबे समय से लंबित लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर अब सरकार ने प्रक्रिया तेज कर दी है. इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए सर्च कमेटी के गठन की तैयारी शुरू कर दी गई है. माना जा रहा है कि इस कदम से जल्द ही राज्य को नया लोकायुक्त मिल सकता है, जो भ्रष्टाचार के मामलों की जांच में अहम भूमिका निभाएगा.
दरअसल, लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार पर लगातार सवाल उठते रहे हैं. मामला कोर्ट तक भी पहुंचा, जहां देरी को लेकर सरकार को कई बार फटकार भी लगी. हाईकोर्ट ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए सरकार से जवाब तलब किया था और समयसीमा के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए थे.
सरकार ने सर्च कमेटी बनाने का लिया निर्णय
इन परिस्थितियों के बीच अब सरकार ने चयन प्रक्रिया को गति देने के लिए सर्च कमेटी बनाने का निर्णय लिया है. यह सर्च कमेटी विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी और विशेषज्ञ लोगों के नामों का पैनल तैयार करेगी. इसमें न्यायिक, प्रशासनिक और अन्य क्षेत्रों से जुड़े अनुभवी व्यक्तियों को शामिल किया जाएगा, जिनमें से चयन समिति अंतिम नामों पर विचार करेगी.
कैसे होती है लोकायुक्त की नियुक्ति
नियमों के अनुसार, लोकायुक्त की नियुक्ति एक उच्चस्तरीय चयन समिति की सिफारिश पर होती है. इस समिति में मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश या उनके नामित न्यायाधीश और एक प्रख्यात विधि विशेषज्ञ शामिल होते हैं. यही समिति सर्च कमेटी द्वारा सुझाए गए नामों में से उपयुक्त उम्मीदवार का चयन करती है.
सर्च कमेटी में ये लोग हो सकते हैं शामिल
सूत्रों के अनुसार, सर्च कमेटी में ऐसे विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा जिनका अनुभव प्रशासन, कानून, वित्त, बैंकिंग, प्रबंधन और सतर्कता जैसे क्षेत्रों में हो. इससे चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी.
गौरतलब है कि उत्तराखंड में लोकायुक्त का पद लंबे समय से खाली पड़ा है, जिससे भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों के निस्तारण पर भी असर पड़ा है. लोकायुक्त एक स्वतंत्र संस्था होती है, जो मुख्यमंत्री, मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों की जांच करती है और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करती है.
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