उत्तर प्रदेश के अयोध्या में मंगलवार को राम मंदिर परिसर स्थित शेषावतार मंदिर के शिखर पर वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच भव्य ध्वजारोहण समारोह संपन्न हुआ. लेकिन धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के इस आयोजन के बीच एक बार फिर ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी चर्चा का विषय बन गई. समारोह में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, सदस्य अनिल मिश्रा और गोपाल राव की उपस्थिति की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं.
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की जांच के दौरान ट्रस्ट से जुड़े कई नाम सार्वजनिक चर्चाओं में आए थे. इसी बीच एसआईटी अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप चुकी है. ऐसे समय में शेषावतार मंदिर ध्वजारोहण समारोह की तस्वीरों और वीडियो ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है.
सोशल मीडिया पर चंपत राय को लेकर उठे सवाल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई यूजर्स ने कार्यक्रम के वीडियो साझा करते हुए अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं. एक यूजर ने लिखा, “चंपत राय का भाषण सुनिए. यह कल शाम शेषावतार मंदिर समारोह का है. कोई संकोच नहीं, कोई झिझक नहीं, अपनी अगुवाई में हुए महापाप का जरा भी पश्चाताप नहीं. वही अधिकार, वही जलवा, वही प्रभुत्व.”
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वहीं एक अन्य यूजर ने टिप्पणी करते हुए लिखा, “किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता. सबको पता है कि कुछ नहीं होगा. अगर कोई एक फंसेगा या उसके खिलाफ कार्रवाई होगी तो वह बाकी लोगों की भी पोल खोल देगा.”
हालांकि सोशल मीडिया पर व्यक्त की जा रही ये प्रतिक्रियाएं संबंधित यूजर्स के व्यक्तिगत विचार हैं. जांच एजेंसियों की ओर से अभी तक किसी भी व्यक्ति की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है. ऐसे में एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और शासन के अगले कदमों पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं.
300 वर्ष पुराणी पाण्डुलिपि समर्पित
इस अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु और संत-महात्मा मौजूद रहे. कार्यक्रम के दौरान कुमारगंज निवासी धर्मपरायण सनातनी जंग जीत बहादुर सिंह ने अपने परिवार के साथ लगभग 250 से 300 वर्ष पुरानी श्रीरामचरितमानस की दुर्लभ पांडुलिपि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एवं अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय को समर्पित की. ट्रस्ट के अनुसार वैज्ञानिक पद्धति से संरक्षण और परिरक्षण के बाद इस अमूल्य धरोहर को प्रदर्शित करने की व्यवस्था की जाएगी.
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