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उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद अपनी समृद्ध शिल्पकला और पारंपरिक विरासत के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. करीब चार सदियों पुराने पीतल उद्योग के कारण इसे ‘पीतल नगरी’ कहा जाता है, जबकि यहां के पद्मश्री सम्मानित कारीगरों और मशहूर मुरादाबादी मूंग दाल ने भी इस शहर की पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूत किया है. यही वजह है कि मुरादाबाद आज देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अपनी अलग छाप छोड़ चुका है.
मुरादाबाद पूरी दुनिया में पीतल नगरी के नाम से जाना जाता है. यहां बने पीतल के उत्पाद देश-विदेश में निर्यात किए जाते हैं. इसके अलावा इस शहर को पांच खास पहचान भी मिली है, जिनमें पीतल उद्योग, पद्मश्री सम्मानित दिलशाद हुसैन, पद्मश्री सम्मानित बाबूराम यादव, पद्मश्री सम्मानित चिरंजीलाल यादव और यहां की मशहूर मूंग की दाल शामिल हैं. इन सभी ने मुरादाबाद को देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अलग पहचान दिलाई है.

मुरादाबाद को पूरी दुनिया में पीतल नगरी के नाम से जाना जाता है. करीब 400 साल पुराना पीतल उद्योग इस शहर की पहचान बन चुका है. यहां के कारीगरों के हाथों से तैयार पीतल के उत्पाद अपनी बेहतरीन फिनिशिंग और आकर्षक डिजाइन के लिए देश-विदेश में मशहूर हैं. यही कारण है कि मुरादाबाद के पीतल उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अच्छी मांग है और इनका बड़े पैमाने पर निर्यात किया जाता है.

मुरादाबाद में तैयार होने वाले पीतल के 80 प्रतिशत से अधिक उत्पाद विदेशों में निर्यात किए जाते हैं. अमेरिका, कनाडा, यूरोप, दुबई, ऑस्ट्रेलिया और एशिया के कई देशों में यहां के हैंडीक्राफ्ट की भारी मांग है. इस उद्योग से पांच लाख से अधिक कारीगर और व्यापारी सीधे जुड़े हैं. कम लागत, बारीक कारीगरी और आकर्षक डिजाइन के कारण मुरादाबाद का पीतल वैश्विक पहचान बना चुका है. यही वजह है कि इस शहर को पूरी दुनिया पीतल नगरी के नाम से जानती है.
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मुरादाबाद को पीतल नगरी की वैश्विक पहचान दिलाने में पद्मश्री दिलशाद हुसैन का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. अपनी बेजोड़ नक्काशी और मेटल हैंडीक्राफ्ट कला के दम पर उन्होंने देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में मुरादाबाद का नाम रोशन किया है. दिलशाद हुसैन मेटल पर गुलकारी, छेनी, तारकशी और नक्काशी के उस्ताद माने जाते हैं. उनके हाथों से तैयार हर कलाकृति बारीक शिल्पकला का उत्कृष्ट नमूना होती है. फूल-पत्ती, बेल-बूटे और मुगल शैली के डिजाइनों को वे पीतल पर बेहद खूबसूरती से उकेरते हैं.

दिलशाद हुसैन की कारीगरी की पहचान अमेरिका, कनाडा, यूरोप, दुबई और एशिया तक है. उनके बनाए डेकोरेटिव पीस और मेटल आर्टवर्क की बड़े होटलों, शोरूम और कला प्रेमियों के बीच खास मांग रहती है. कला के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2019 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया. आज भी हजारों युवा कारीगर उनसे प्रेरणा लेकर इस कला को सीख रहे हैं. उनकी प्रतिभा ने मुरादाबाद के पीतल उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है.

मुरादाबाद को पीतल नगरी के रूप में देश-विदेश में पहचान दिलाने वालों में पद्मश्री बाबूराम यादव का नाम प्रमुखता से लिया जाता है. वह पीतल पर बारीक नक्काशी और धातु शिल्प के कुशल कारीगर हैं. उनके हाथों से तैयार हर कलाकृति उनकी उत्कृष्ट शिल्पकला का परिचय देती है. फूल-पत्ती और मुगल शैली के डिजाइनों को वह पीतल पर बेहद खूबसूरती से उकेरते हैं. उनकी कला के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2024 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया. आज भी उनके काम से हजारों कारीगर प्रेरणा लेते हैं और मुरादाबाद के पीतल उद्योग को नई पहचान दिलाने में योगदान दे रहे हैं.

पीतल नगरी की पहचान को नई ऊंचाई देने में पद्मश्री चिरंजीलाल यादव का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. पीतल और अन्य धातुओं पर बारीक नक्काशी, गुलकारी और हस्तशिल्प कला में उन्हें महारत हासिल है. उनके बनाए सजावटी सामान, शोपीस और हैंडीक्राफ्ट देश-विदेश में पसंद किए जाते हैं, जबकि अमेरिका, यूरोप और दुबई समेत कई देशों में उनके काम की मांग है. कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2026 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया. इस सम्मान के बाद उनकी पहचान और अधिक मजबूत हुई है. उनकी कला से प्रेरित होकर आज हजारों कारीगर मुरादाबाद के पीतल उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में योगदान दे रहे हैं.

पीतल उद्योग के अलावा मुरादाबाद की पहचान उसकी मशहूर मूंग दाल से भी जुड़ी है. मुरादाबादी मूंग दाल अपने खास स्वाद, सुगंध और गुणवत्ता के लिए जानी जाती है. इसे साबुत मूंग को भिगोकर, पीसकर और मसालों के साथ तैयार किया जाता है, जिससे इसका स्वाद अलग और लाजवाब बन जाता है. आज मुरादाबादी मूंग दाल के पैकेट और इसका जायका देश के कई शहरों में आसानी से मिल जाता है. अपने बेहतरीन स्वाद और गुणवत्ता के दम पर इस व्यंजन ने मुरादाबाद को देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अलग पहचान दिलाई है.