अलीगंज स्थित गेमिंग जोन में आग लगने से 15 छात्र-छात्राओं की मौत के मामले की जांच एसआईटी ने तेज कर दी है। एसआईटी ने बुधवार को अपनी जांच के दूसरे दिन जिला प्रशासन, नगर निगम और पाॅवर काॅर्पोरेशन के अफसरों को तलब किया और उनसे गहन पूछताछ की। तीनों विभागों के अफसर रिपोर्ट लेकर भी आए थे, जिसमें तमाम कमियां होने पर उसे दुरुस्त कर दोबारा देने की हिदायत के साथ वापस कर दिया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अग्निकांड की जांच के लिए अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ जोन के एडीजी प्रवीण कुमार की दो सदस्यीय एसआईटी घटना से जुड़े हर पहलू को गहनता से खंगाल रही है। एसआईटी का फोकस खासकर बिल्डिंग के अवैध निर्माण, बिजली कनेक्शन, आपातकालीन सेवाओं के पहुंचने में हुई देरी और मौके पर संसाधनों की कमी के इर्द-गिर्द घूम रही है।
वहीं आज जिला प्रशासन, नगर निगम और पाॅवर काॅर्पोरेशन के अधिकारी अपनी रिपोर्ट लेकर आए, लेकिन उसमें घटना के जिम्मेदारों के नाम को लेकर एसआईटी संतुष्ट नहीं दिखी और उनसे बीते 10 वर्षों के दौरान बिल्डिंग को दी गई सभी अनुमतियों, उसके अवैध होने पर की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा और सभी जिम्मेदार तत्कालीन अधिकारियों के नाम देने को कहा। एसआईटी अब मृतकों के परिजनों, घायलों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान लेगी। साथ ही राहत कार्यों के दौरान हुई देरी और संसाधनों की कमी के बारे में संबंधित विभागों से जवाब-तलब कर अपनी रिपोर्ट शासन को देगी। बता दें कि लखनऊ विकास प्राधिकरण पहले ही अपनी रिपोर्ट दे चुकी है।
विभागों में विरोधाभास
एसआईटी ने खासकर बिजली विभाग के अफसरों से बिल्डिंग में समय-समय पर लोड बढ़ाने की अनुमति दिए जाने के बारे में पूछा। वहीं नगर निगम के अफसरों से बिल्डिंग के भू-उपयोग और पेट शॉप खोलने की अनुमति के बारे में भी सवाल किए गए। सूत्रों के मुताबिक बिल्डिंग के रिहायशी अथवा व्यावसायिक होने के बारे में विभागों के अफसरों में विरोधाभास देखने को मिला। इसे लेकर एसआईटी ने नाराजगी जताते हुए स्पष्ट करने को कहा है।