लखनऊ में मोहर्रम के छठे दिन बड़ा इमामबाड़ा में आग का मातम हुआ। लगभग 30 मिनट तक लोग धधकते अंगारों पर चले। इसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद आग पर ‘या हुसैन’ का नारा लगाते हुए चलते नजर आए। शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने मातम करने वाले दस्ते को सलामी दी। मौलाना ने कहा बड़ा इमामबाड़ा में 151 साल से आग का मातम हो रहा है। मौलाना बोले इसकी शुरुआत बर्मा से आए कुछ लोगों ने की थी। कर्बला के मैदान में हज़रत इमाम हुसैन को शहीद करने के बाद खेमे (टेंट) में आग लगा दी गई थी, जिसमें उस समय हजरत इमाम हुसैन के खानदान के छोटे बच्चे और महिलाएं मौजूद थीं। जंग खत्म होने के बाद भी यजीदी फौजियों का जुल्म नहीं रुका था। उसी को याद करते हुए हर साल बड़ा इमामबाड़ा में यह आग का मातम होता है। अकीदतमंद आग पर चल कर बताते हैं कि अगर उस समय कर्बला में होते तो आग पर चल कर इमाम हुसैन के खेमे को बचाते। बर्मा से आए हुए लोगों ने इस परंपरा को लखनऊ में शुरू किया। इसके बाद डेढ़ सौ साल गुजर चुके हैं शहर के लोग इसे आगे बढ़ा रहे हैं। यहां के लोगों को हजरत इमाम हुसैन से इतनी ज्यादा अकीदत है कि उनसे जुड़ी हुई हर एक चीज को फौरन अपना लेते हैं। इमाम हुसैन की जिंदगी हम लोगों के लिए सबक है। इमाम और उनके 72 साथी शहीद तो हो गए मगर गलत इंसान के साथ नहीं खड़े हुए और न ही अन्याय को बर्दाश्त किया। इसलिए जरूरी है कि हम सभी लोग इमाम हुसैन को पढ़ें और उनकी बातों को अपने जीवन में लागू करें।
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लखनऊ में बड़ा इमामबाड़ा में हुआ आग का मातम:150 साल पुरानी है परंपरा, मौलाना जवाद – बोले बर्मा से आए लोगों ने शुरू किया था