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Ram MAndir News: राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक के बाद महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर अब अयोध्या के व्यापारियों की भी प्रतिक्रिया सामने आने लगी है. व्यापारियों का कहना है कि यह फैसला समय की जरूरत था. उनका मानना है कि इससे रामभक्तों का भरोसा फिर से मजबूत होगा.
अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक के बाद महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे को लेकर अयोध्या के व्यापारियों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं. व्यापारियों का कहना है कि यह फैसला आवश्यक था और इससे रामभक्तों के बीच भरोसा बहाल करने में मदद मिल सकती है. हालांकि उनका यह भी कहना है कि राम मंदिर में चंदा चोरी के मामले का असर केवल ट्रस्ट की छवि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अयोध्या के स्थानीय व्यापार पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ा है.
राम मंदिर के आसपास लड्डू प्रसाद का व्यापार करने वाले विकास गुप्ता ने कहा कि चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार किया जाना जरूरी था. उनके अनुसार यह फैसला उन्होंने स्वयं लिया है, जो स्वागत योग्य है. उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की व्यवस्था में जो खामियां सामने आईं, उसका असर पूरे देश ने देखा. इस विवाद के बाद अयोध्या के व्यापार पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. विकास गुप्ता का कहना है कि अब ट्रस्ट के नए पदाधिकारियों से उम्मीद है कि वे पारदर्शिता और बेहतर व्यवस्था के साथ काम करेंगे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों और रामभक्तों का विश्वास मजबूत बना रहे.
वहीं व्यापारी ओमप्रकाश गुप्ता ने कहा कि अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा देना सराहनीय कदम है. उन्होंने कहा कि नए महासचिव और ट्रस्ट के पदाधिकारियों को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे श्रद्धालुओं की भावनाओं को किसी भी प्रकार की ठेस न पहुंचे. उन्होंने बताया कि चंदा चोरी के विवाद के बाद अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कमी देखने को मिली है, जिसका सीधा असर व्यापार पर पड़ा है. पहले की तुलना में आमदनी काफी घट गई है और कई दुकानदार आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं.
प्रभु श्रीराम से जुड़ी धार्मिक सामग्री बेचने वाले ध्रुव गुप्ता ने भी इस्तीफे को सही निर्णय बताया. उनका कहना है कि यदि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग इस्तीफा नहीं देते तो रामभक्तों की आस्था को और अधिक ठेस पहुंचती. उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की जिम्मेदारी मंदिर की व्यवस्था और श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने की थी. लेकिन चंदा चोरी के मामले के बाद पिछले लगभग एक महीने से अयोध्या के व्यापार पर प्रतिकूल असर पड़ा है. श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आने से दुकानदारों की बिक्री प्रभावित हुई है, जबकि अयोध्या का अधिकांश व्यापार रामभक्तों और पर्यटकों पर ही निर्भर करता है.
स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि अब नई टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती रामभक्तों का विश्वास दोबारा जीतने और मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता स्थापित करने की होगी. उनका कहना है कि यदि ट्रस्ट प्रभावी कदम उठाता है और व्यवस्थाओं में सुधार होता है तो श्रद्धालुओं की संख्या फिर से बढ़ेगी और अयोध्या का व्यापार भी धीरे-धीरे पटरी पर लौट सकेगा. व्यापारियों को उम्मीद है कि आने वाले समय में मंदिर प्रशासन और स्थानीय कारोबार, दोनों के लिए सकारात्मक माहौल बनेगा.
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अभिजीत चौहान, News18 Hindi के डिजिटल विंग में सब-एडिटर हैं. वर्तमान में अभिजीत उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और वायरल ख़बरें कवरेज कर रहे हैं. AAFT कॉलेज से पत्रकारिता की मास्…और पढ़ें