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Allahabad Highcourt: ईरानी नेताओं की तस्वीरें लगाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि याचिका में पुलिस कार्रवाई को लेकर कोई स्पष्ट घटना या ठोस जानकारी नहीं दी गई है. केवल सामान्य आरोपों के आधार पर अदालत हस्तक्षेप नहीं कर सकती.
ईरानी नेताओं के पोस्टर हटाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में ईरानी नेताओं की तस्वीरें लगाने से जुड़े मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि याचिका में पुलिस की कार्रवाई को लेकर स्पष्ट और किसी खास घटना का जिक्र नहीं किया गया है. ऐसे में केवल सामान्य आरोपों के आधार पर अदालत इस मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकती.
यह याचिका मजलिस-ए-उलेमा-ए-हिंद की ओर से दाखिल की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उत्तर प्रदेश में पुलिस अधिकारी निजी संपत्तियों पर ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई और अन्य शिया धार्मिक नेताओं की तस्वीरें लगाने से रोक रहे हैं या उन्हें हटाने की कार्रवाई कर रहे हैं. याचिका में पुलिस को ऐसी कार्रवाई से रोकने के निर्देश देने की मांग की गई थी.
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
इलाहाबाद हाईकोर्ट की जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की. अदालत ने कहा कि याचिका में पुलिस के हस्तक्षेप को लेकर केवल सामान्य बातें कही गई हैं. इसमें यह नहीं बताया गया कि किस जगह पर, किस व्यक्ति के साथ और किस तरह की कार्रवाई की गई.
अदालत ने 7 जुलाई के आदेश में कहा कि किसी खास घटना या शिकायत के बिना इतनी व्यापक मांग पर जनहित याचिका के जरिए सुनवाई करना उचित नहीं है. अदालत ने यह भी कहा कि अगर किसी व्यक्ति को किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ कोई विशेष शिकायत है तो वह कानून के तहत उपलब्ध उपायों का सहारा ले सकता है.
याचिका में लगाए गए थे ये आरोप
याचिका में कहा गया था कि धार्मिक शोक सभाओं के दौरान कुछ लोग ईरान के प्रमुख शिया धार्मिक नेताओं की तस्वीरें निजी जगहों पर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शित कर रहे थे. आरोप लगाया गया कि पुलिस अधिकारी इसमें दखल दे रहे हैं और तस्वीरें हटाने की कोशिश कर रहे हैं. याचिका में राज्य के सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वे निजी संपत्तियों पर लगाए गए ऐसे पोस्टर, बैनर या तस्वीरों को हटाने की कार्रवाई न करें, जब तक वह कानून के खिलाफ न हों.
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सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें