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Sitapur News: यूपी के सीतापुर में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मिशनरी की 100 करोड़ रुपये की 43 बीघा नजूल जमीन को सरकारी कब्जे में ले लिया है. इस जमीन पर अब भव्य वेंडिंग जोन बनाया जाएगा, जिससे पटरी दुकानदारों को बड़ी राहत मिलेगी.
43 बीघा नजूल जमीन को राज्य सरकार ने किया अधिग्रहित, चर्च और स्कूल पर आया ये फैसला (फोटो-AI)
Sitapur News: उत्तर प्रदेश के सीतापुर में जिला प्रशासन ने अवैध कब्जों और नजूल भूमि को लेकर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है. जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर के निर्देश पर प्रशासन ने मिशनरी के कब्जे वाली करीब 43 बीघा नजूल जमीन को वापस राज्य सरकार के अधीन (निहित) कर लिया है. इस कीमती जमीन की मौजूदा बाजार कीमत करीब 100 करोड़ रुपये आंकी जा रही है. इस बड़ी कार्रवाई के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय रेहड़ी-पटरी दुकानदारों में खुशी की लहर है.
दिवार पर चस्पा हुआ आदेश, मौके पर ली गई नाप
बुधवार को भारी पुलिस बल और राजस्व टीम की मौजूदगी में प्रशासन ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया. कलेक्टर न्यायालय से जारी बेदखली और अधिग्रहण के आदेश को मिशन गर्ल्स स्कूल की दीवार पर चस्पा कर दिया गया. इसके तुरंत बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर ही पूरी जमीन की नापजोख (पैमाइश) कराई और उसे पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया. एसडीएम सदर डॉ. जनार्दन ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में रहकर पूरी की गई है.
120 साल पुराना है जमीन का इतिहास
सरकारी दस्तावेजों और अभिलेखों के मुताबिक, यह पूरी जमीन ब्रिटिश काल के दौरान 30 जनवरी 1906 को ‘मिशन बंगला’ के लिए उपलब्ध कराई गई थी. सरकारी रिकॉर्ड में यह जमीन पूरी तरह से नजूल (सरकारी भूमि) के रूप में दर्ज है. कुल 43 बीघा जमीन में से करीब 7 बीघा हिस्से पर फिलहाल मेथोडिस्ट मिशन गर्ल्स स्कूल और एक चर्च संचालित हो रहा है.
कागजात नहीं दिखा पाया स्कूल प्रशासन
इस बेशकीमती नजूल भूमि को वापस लेने से पहले प्रशासन ने पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया था. कलेक्टर न्यायालय की ओर से स्कूल प्रबंधक को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था. इस नोटिस में स्कूल प्रबंधन को जमीन से जुड़े अपने मालिकाना हक के दस्तावेज और अभिलेख पेश करने के लिए पूरे 15 दिन का समय दिया गया था. हालांकि, तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी स्कूल प्रशासन अपनी पैरवी में कोई भी वैध दस्तावेज कोर्ट के सामने पेश नहीं कर सका. इसके बाद कलेक्टर न्यायालय ने जमीन को सरकारी घोषित करने का आदेश जारी कर दिया.
स्कूल और चर्च का क्या होगा?
कार्रवाई को लेकर आम जनता में किसी तरह का भ्रम न फैले, इसे देखते हुए एसडीएम सदर डॉ. जनार्दन ने स्थिति साफ की है. उन्होंने बताया कि जिस 7 बीघा जमीन पर स्कूल और चर्च चल रहे हैं, उन्हें फिलहाल बंद नहीं किया जाएगा और वे पहले की तरह ही संचालित होते रहेंगे. बाकी बची हुई 36 बीघा खाली जमीन को पूरी तरह से प्रशासन ने सील कर अपने कब्जे में ले लिया है. इस मामले में आगे की रूपरेखा के लिए राज्य शासन से दिशा-निर्देश मांगे गए हैं.
सड़कों को मिलेगी जाम से मुक्ति, बनेगा ‘वेंडिंग जोन’
प्रशासन इस खाली कराई गई 36 बीघा जमीन का इस्तेमाल शहर के विकास के लिए करने जा रहा है. एसडीएम ने बताया कि इस अधिग्रहित जमीन पर एक आधुनिक ‘वेंडिंग जोन’ विकसित किया जाएगा. सीतापुर शहर में सड़कों के किनारे लगने वाली तमाम पटरी और रेहड़ी दुकानों को इस वेंडिंग जोन में बेहद व्यवस्थित तरीके से शिफ्ट किया जाएगा. इससे शहर को रोजाना लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम और अतिक्रमण की समस्या से हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी. इस फैसले के बाद पटरी दुकानदारों ने खुशी जाहिर की है कि अब उन्हें व्यापार के लिए एक स्थायी और सुरक्षित जगह मिल सकेगी.
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राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें