उत्तराखंड भाजपा में अंदरूनी सियासत को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. अटकलें हैं कि अंदरखाने कुछ ठीक नहीं चल रहा है. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के 28 मई से प्रस्तावित तीन दिवसीय दौरे से पहले गदरपुर में हुई राजनीतिक गतिविधियों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. गदरपुर विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे के आवास पर लगातार बड़े नेताओं की मुलाकातों को महज संयोग नहीं माना जा रहा.
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सबसे पहले गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी पांडे से मिलने पहुंचे. दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में करीब आधे घंटे तक बातचीत हुई. इसके अगले दिन पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत भी पांडे के घर पहुंचे. हालांकि दोनों नेताओं ने मुलाकात को सामान्य बताया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसके अलग मायने निकाले जा रहे हैं.
पांडे ने अपने ही नेताओं पर साधा था निशाना
त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मीडिया से कहा कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और किसी तरह की नाराजगी नहीं है. हालांकि उनका बयान “जाकी रही भावना जैसी…” चर्चा में आ गया. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की सोच न्याय की होनी चाहिए, अन्याय की नहीं. इसे कई लोग सरकार पर परोक्ष टिप्पणी मान रहे हैं. दरअसल, हाल ही में अरविंद पांडे ने पार्टी के भीतर “अलग पार्टी चलाने” वाले बयान देकर सियासी हलचल बढ़ा दी थी. उन्होंने बिना नाम लिए कुछ नेताओं पर निशाना साधा था. इसके बाद भाजपा में गुटबाजी की चर्चाएं तेज हो गईं.
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मतभेदों को नियंत्रित करने में जुटी भाजपा
इसी बीच पांडे पर बुक्सा जनजाति की जमीन से जुड़े विवाद ने भी मामला गर्माया. विपक्ष ने सरकार और भाजपा को घेरा, जबकि पार्टी ने आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया. अब नितिन नवीन के दौरे में संगठन समीक्षा और 2027 चुनाव की रणनीति पर चर्चा होनी है. ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा नेतृत्व चुनाव से पहले अंदरूनी मतभेदों को नियंत्रित करने में जुट गया है.