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बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर के माध्यम से जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र और अन्य जैविक तैयार किए जाएंगे. इन उत्पादों का उपयोग रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के विकल्प के रूप में किसानों को करवाया जाएगा. जिससे इनकी उपलब्धता होने से किसानों को कम लागत में प्राकृतिक खेती करने का अवसर मिलेगा और वह खेती में अच्छा मुनाफा मुनाफा कमा सकेंगे.
चित्रकूटः बुंदेलखंड के चित्रकूट जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि विभाग ने बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) की चयन प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस योजना के तहत चयनित किसान के केंद्रों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे स्थानीय स्तर पर जैविक खेती के लिए आवश्यक उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे. इससे किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने में मदद मिलेगी, इसके साथ ही इसको बनाने वाले लोगों को रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
1 लखा तक की मिलेगी अनुदान की सहायता
आप को बता दे कि बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर के माध्यम से जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र और अन्य जैविक तैयार किए जाएंगे. इन उत्पादों का उपयोग रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के विकल्प के रूप में किसानों को करवाया जाएगा. जिससे इनकी उपलब्धता होने से किसानों को कम लागत में प्राकृतिक खेती करने का अवसर मिलेगा और वह खेती में अच्छा मुनाफा मुनाफा कमा सकेंगे. इस योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत गौशालाएं, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), स्वयं सहायता समूह, पैक्स समितियां, प्राकृतिक खेती करने वाले किसान तथा ग्रामीण उद्यमी आवेदन कर सकते हैं. चयनित बीआरसी संचालकों को केंद्र की स्थापना और संचालन के लिए एक लाख रुपये तक की अनुदान की सहायता दी जाएगी.
27 जून आवेदन की अतिम तारीख
जानकारी के लिए बता दे कि इस आवेदन करने के लिए जिल के इच्छुक किसान एवं संस्थाएं अपने आवेदन पत्र के साथ तैयार किए गए बायो इनपुट्स के फोटो संलग्न कर 27 जून 2026 की शाम 5 बजे तक उप कृषि निदेशक कार्यालय चित्रकूट में जमा कर सकते है. आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र आवेदकों का चयन किया जाएगा. वही इस संबंध में उप कृषि निदेशक जेएल गुप्ता ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि बताया कि भारत सरकार के निर्देशानुसार जिले में बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर स्थापित करने का लक्ष्य प्राप्त हुआ है. उन्होंने बताया कि आवेदन वही व्यक्ति या संस्था कर सकती है, जो पहले से प्राकृतिक खेती से जुड़ी हो और जैविक इनपुट तैयार करने का अनुभव रखती हो.
आवेदनकर्ता के पास लगभग 10 या उससे अधिक गौवंश होना भी आवश्यक है, क्योंकि प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले अधिकांश उत्पाद गोबर और गोमूत्र से तैयार किए जाते हैं.उन्होंने बताया कि चयनित केंद्र संचालक अन्य किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण भी देंगे. साथ ही अपने केंद्र पर तैयार जैविक उत्पादों की बिक्री कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे, इससे ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और प्राकृतिक खेती को भी मजबूती मिलेगी.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें