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बरसात के मौसम में अधिक नमी और उमस के कारण आम के पौधों में एन्थ्रेक्नोज (पत्तियों और टहनियों पर काले धब्बे), पाउडरी मिल्ड्यू (सफेद पाउडर जैसा), और गुच्छा रोग (मैंगो मालफॉर्मेशन) जैसी फंगल बीमारियाँ सबसे ज्यादा लगती हैं. अब बात आती है किसान इन बीमारियों की कैसे पहचान कर सकते हैं और अपने आम के पेड़ों को किन चीजों का इस्तेमाल कर इन बीमारियों से बचा सकते हैं. सबसे पहले बात आती है कुछ सावधानियां जिनको बरतना बहुत ही जरूरी होता है यानी कि आपके आम के बाग में पानी भरा हुआ ना हो, अन्यथा जड़ गलन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ती है
सहारनपुरः बरसात का मौसम शुरू हो चुका है बरसात का मौसम जहां एक और लोगों को गर्मी से राहत देता है. वहीं दूसरी ओर आम की बागवानी करने वाले किसानों के लिए पेड़ों में कई तरह की समस्याएं लेकर आता है. देखा जाता है कि आम की बागवानी करने वाले किसान बरसात के मौसम में 50% तक अपने आमों की तुड़ाई करने के बाद अपने पेड़ों को खाली कर देते हैं. पेड़ों को खाली करने के बाद उनको ऐसे ही छोड़ दिया जाता है और बरसात में उनमें कई तरह की बीमारियां तेजी से पनपती है जो कि पौधों को भारी नुकसान पहुंचती है और अगले वर्ष आने वाले फलों को भी कम करती है.
बारिश में पौधों को मिलती है अधिक नमी
बरसात के मौसम में अधिक नमी और उमस के कारण आम के पौधों में एन्थ्रेक्नोज (पत्तियों और टहनियों पर काले धब्बे), पाउडरी मिल्ड्यू (सफेद पाउडर जैसा), और गुच्छा रोग (मैंगो मालफॉर्मेशन) जैसी फंगल बीमारियाँ सबसे ज्यादा लगती हैं. अब बात आती है किसान इन बीमारियों की कैसे पहचान कर सकते हैं और अपने आम के पेड़ों को किन चीजों का इस्तेमाल कर इन बीमारियों से बचा सकते हैं. सबसे पहले बात आती है कुछ सावधानियां जिनको बरतना बहुत ही जरूरी होता है यानी कि आपके आम के बाग में पानी भरा हुआ ना हो, अन्यथा जड़ गलन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ती है, जिसके साथ-साथ पेड़ में सूखने की समस्या और गांठ बनने की समस्या भी तेजी से आती है. बचाव के साथ-साथ कुछ ऐसी रासायनिक दवाइयां भी मार्केट में उपलब्ध है जिनका इस्तेमाल बागवान आम के पेड़ों पर कर इन सभी बीमारियों से छुटकारा पा सकते हैं उसको लेकर कृषि एक्सपर्ट पूरी जानकारी दे रहे हैं.
आम के पेड़ को होती है ये बिमारी
कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी व प्रोफेसर डॉक्टर आई.के कुशवाहा ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि आम का जो बाग होता है उसमें 50% किसान बरसात में आम की तुड़ाई कर देते हैं. उसके बाद उसको ऐसे ही छोड़ देते हैं जबकि बरसात के मौसम में कई तरह की बीमारियां पौधे को भारी नुकसान पहुंचती है. एक आम के पत्तियों में धब्बे लगते हैं उसको एंथ्रेक्नोज़ बीमारी कहते हैं. दूसरी आम का पेड़ ऊपर से सूखने लगता है जिसको डाइबेक बीमारी कहते है. तीसरी बीमारी सूट बॉल मेकर जिसमें पौधे के ऊपर गुलाब जैसी कलियां बन जाती है. इन बीमारियों को दूर करने के लिए किसान भाई इतना जरूर ध्यान दें कि आम के बाग में लगातार पानी ना भरा रहे.
ऐसे करें बचाव
अगर पौधों में पानी भरा रहेगा तो जड़ों में पोषक और हवा का संचार कम होने के कारण गलन जैसी समस्याएं आती है. साथ ही पौधे की टहनियां सूखने की समस्या भी आने लगती है. अगर इन समस्याओं से पेड़ों को बचाना है तो बाग की साफ सफाई रखे. कही पर भी गांठ जैसा दिख रहा हो तो उसको काटकर अलग कर दे, अगर कोई टहनी सुख गई है तो उसको पेड़ से अलग कर दे साथ ही ऊपर से सूखने की समस्या आने पर तुरंत बेंटोनाइट सल्फर और नैनो DAP जैसे उर्वरकों का छिड़काव और पेड़ की जड़ में डाले. अगर ज्यादा समस्या है तो कॉपर ऑक्सीक्लोराइड के दो छिड़काव 2 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी के हिसाब से जरूर करे. अगर इस तरीके से करेंगे तो जो पेड़ में गलन जैसी समस्याएं हैं सूखने की समस्याएं हैं, उन सभी से बचाव होगा.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें