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Animal Husbandry Rainy Season : मानसून दस्तक दे चुका है. बारिश का मौसम पशुपालकों के लिए हमेशा से घातक रहा है. इस मौसम में पशुओं की देखभाल में थोड़ी सी लापरवाही कब जानलेवा बन जाए, पता नहीं चल पाता. बरसात में बुखार से लेकर खुरपका और मुंहपका रोग तेजी से फैलते हैं. फिरोजाबाद कृषि विज्ञान केंद्र के पशु वैज्ञानिक डॉ. ओमकार सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि बारिश में पशुओं को चारे के साथ-साथ मिनरल मिक्चर भी खिलाना चाहिए. कई किसान अपने पशुओं को बारिश में ही बांधें रखते हैं. पशु भीगते रहते हैं, सबसे बड़ी गलती यही है.
फिरोजाबाद. बरसात का मौसम पशुपालकों के लिए हमेशा से आफत लेकर आता रहा है. इस मौसम में पशुओं की देखभाल में थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा बन जाती है. बरसात के दौरान पशुओं में बुखार से लेकर खुरपका और मुंहपका रोग तेजी से फैलते हैं. इससे बचाने के लिए पशुपालकों को सावधानी बरतनी होगी. बारिश में पशुओं को चारा खिलाने के साथ-साथ मिनरल मिक्चर भी खिलाना चाहिए. कई बार बारिश में भीगने के कारण पशुओं को हल्का बुखार आ सकता है, इसलिए पशुओं को बारिश से बचाकर रखना चाहिए. किसी भी तरह की परेशानी होने पर तुरंत पशु चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए.
ये गलती खतरनाक
फिरोजाबाद कृषि विज्ञान केंद्र के पशु वैज्ञानिक डॉ. ओमकार सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि बरसात का मौसम शुरू हो चुका है. किसान भाइयों को अपने पशुओं के रख-रखाव की उचित व्यवस्था कर लेनी चाहिए. कई किसान अपने पशुओं को बारिश में ही बांधें रखते हैं. पशु भीगते रहते हैं, जिससे उन्हें वायरल बुखार पकड़ सकता है. ऐसे में सबसे पहले पशुपालकों को पशुशाला (शेड) की व्यवस्था करनी चाहिए. शेड को तैयार करते समय ध्यान रखना चाहिए कि छत से पानी का रिसाव न हो और फर्श हमेशा सूखा रहे. नमी वाले स्थान पर बैक्टीरिया जल्दी पनपते हैं. बारिश में पशुओं को हमेशा ताजा पानी ही पिलाएं और हरे चारे में सूखा चारा मिलाकर दें. बारिश में हरा चारा कम हो जाता है, इसलिए पशुओं को आहार में मिनरल मिक्सचर दे सकते हैं. इसमें 20 से 25 ग्राम जिंक, कॉपर और मैगनीशियम मिक्स करें. सादा नमक भी मिला दें. इससे पशुओं को पैरों में सड़न और लंगडापन जैसी बीमारी नहीं होगी.
दुहने से पहले कर लें ये काम
डॉ. ओमकार के मुताबिक, बरसात के सीजन में अक्सर पशुओं में थनैला, खुरपका-मुंहपका और परजीवी रोग हो जाते हैं. इससे बचाव के लिए पशुओं का टीकाकरण कराना जरूरी है. बारिश में रहने से पशुओं के थन कीचड़ और गीली मिट्टी के संपर्क में आ जाते हैं, इसलिए दूध दुहने से पहले थनों को अच्छे से साफ कर लें. बारिश में संक्रमण से खुरपका और मुंहपका रोग बहुत जल्दी फैलता है. गीले वातावरण के कारण पशुओं के शरीर पर परजीवी रोग हो जाता है, जिससे उनके शरीर पर पिस्सू और टिक्स जल्दी पनपते हैं. डॉक्टर की सलाह लेकर कीटनाशक दवाइयों का इस्तेमाल करें.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें