लखनऊ से विभिन्न धर्म गुरु पहुंचे ईरान । पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा में हुए शामिल हुए । वरिष्ठ शिया धर्म गुरु मौलाना कल्बे जवाद , ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना यासूब अब्बास और स्वामी सारंग विशेष निमंत्रण पर ईरान पहुंचे। 4 जुलाई 2026 से 9 जुलाई 2026 तक आयोजित की जा रही है। 4 महीने बाद अंतिम संस्कार ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के 131 दिन बाद (चार महीने से अधिक समय) उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई। उनका निधन 28 फरवरी 2026 को एक संयुक्त अमेरिकी-इजरायली हवाई हमले में हुआ था। युद्ध और सुरक्षा कारणों के चलते उनका अंतिम संस्कार तुरंत नहीं किया जा सका था, जिसके लिए उनके पार्थिव शरीर को सुरक्षित प्रशीतित (कोल्ड स्टोरेज) में रखा गया था। 4 जुलाई 2026 से तेहरान में उनकी सात दिनों की भव्य अंतिम यात्रा शुरू हुई है। विभिन्न धर्म गुरु हुए शामिल लखनऊ से मौलाना कल्बे जवाद, स्वामी सारंग और मौलाना यासूब अब्बास शामिल हुए। खामेनेई की मौत के बाद शहर में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में भारत में खामेनेई के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम ने भी शिकरत किया था। श्रद्धांजलि सभा मौलाना कल्बे जवाद और मौलाना यासूब अब्बास के द्वारा आयोजित किया गया था। इसके अलावा स्वामी सारंग गंगा जमुना तहजीब के मजबूत सूत्रधार माने जाते है। इसलिए इन तीनों व्यक्तियों को ईरान सरकार की तरफ से विशेष रूप से यात्रा में शामिल होने का अवसर मिला है। ‘ईरान और भारत हमेशा दोस्त रहे’ ईरान से मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि भारत और ईरान के रिश्ते हमेशा बहुत अच्छे रहे हैं। अयातुल्ला की मौत के बाद पूरे भारत में शोक की लहर थी। विशेष रूप से लखनऊ में तीन दिनों तक शोक मनाया गया। करोड़ों की संख्या में आयतुल्लाह के चाहने वाले हैं जिस दिन से उनकी शहादत हुई है तब से लेकर आज तक मायूस है। हम लोग करोड़ों हिंदुस्तानियों की दुआएं और आस्था को लेकर ईरान पहुंचे हैं। ईरान ने आवश्यकता अनुसार हमेशा भारत की मदद किया और भारत ने भी हमेशा ईरान का सहयोग किया यह दो देशों की भाईचारा है।
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लखनऊ से धर्म गुरु पहुंचे ईरान:अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा में हुए शामिल, मौलाना बोले – ईरान और भारत अच्छे दोस्त