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समूह से जुड़ने के बाद सरिता ने अपने खेत में सोनम नाम की बासमती किस्म के चावल की खेती शुरू की. यह चावल लोगों को इतना पसंद आया कि इसकी मांग सिर्फ बहराइच में ही नहीं, बल्कि प्रयागराज, लखनऊ और आसपास के अन्य जिलों में भी बढ़ने लगी. जो कमाई पहले लगभग जीरो थी, वह देखते ही देखते लाखों में पहुंच गई. आज सरिता देवी धान की सिर्फ 1 फसल से ही करीब डेढ़ लाख रुपये की कमाई आराम से कर लेती है.
बहराइच: कहा जाता है सफलता एक दिन में नहीं मिलती, लेकिन अगर मेहनत, लगन और किस्मत साथ दे तो एक दिन जरूर मिलती है. बहराइच जिले की सरिता देवी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. एक समय था जब अपने खर्च के लिए उन्हें घरवालों से पैसे मांगने पड़ते थे और आज वही सरिता लाखों रुपये कमा रही हैं.
बहराइच जिले के नवाबगंज क्षेत्र के छोटे से गांव होलिया की रहने वाली सरिता देवी को पहले गांव के बाहर कोई जानता तक नहीं था. लेकिन आज अपनी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने न सिर्फ बहराइच, बल्कि आसपास के कई जिलों में भी अपनी अलग पहचान बना ली है. अब सरिता का नाम बहराइच के साथ-साथ दूसरे जिलों में भी चर्चा में रहता है.
समूह से जुड़कर बदली ज़िंदगी
सरिता बताती है कि जब वे स्वयं सहायता समूह से नहीं जुड़ी थी. तब उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था कि आगे जिंदगी कैसे चलेगी. घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया था. खाने-पीने तक की दिक्कत थी. इसी बीच गांव की कुछ दीदियों ने उन्हें स्वयं सहायता समूह से जुड़ने की सलाह दी. सरिता ने हिम्मत दिखाई, सोच-समझकर फैसला लिया और समूह से जुड़ गई. इसके बाद उन्होंने ठान लिया कि अब कुछ अपना काम शुरू करना है. यहीं से उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया.
शुरू की सोनम- बासमती की खेती
समूह से जुड़ने के बाद सरिता ने अपने खेत में सोनम नाम की बासमती किस्म के चावल की खेती शुरू की. यह चावल लोगों को इतना पसंद आया कि इसकी मांग सिर्फ बहराइच में ही नहीं, बल्कि प्रयागराज, लखनऊ और आसपास के अन्य जिलों में भी बढ़ने लगी. जो कमाई पहले लगभग जीरो थी, वह देखते ही देखते लाखों में पहुंच गई. आज सरिता देवी धान की सिर्फ 1 फसल से ही करीब डेढ़ लाख रुपये की कमाई आराम से कर लेती है.
जैविक खेती, खुद की पैकिंग और ब्रांडिंग
सरिता सोनम बासमती चावल की खेती रसायन (केमिकल) की जगह पूरी तरह जैविक तरीके से कर रही है. यही वजह है कि उनका चावल स्वादिष्ट होने के साथ-साथ खुशबूदार भी है. चावल की पैकिंग, ब्रांडिंग और बिक्री का पूरा काम सरिता खुद देखती है. उन्होंने प्रति किलोग्राम कीमत ₹50 तय की है. सही दाम और अच्छी क्वालिटी की वजह से लोग उनके चावल की जमकर खरीदारी कर रहे है.
महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा
आज सरिता देवी अपने ‘सोनम’ चावल के दम पर न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर बन गई है, बल्कि जिले की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन चुकी है. उनकी कहानी यह साबित करती है कि अगर हिम्मत, मेहनत और सही दिशा मिल जाए तो गांव की एक साधारण महिला भी सफलता की नई कहानी लिख सकती है.
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काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें