हरिद्वार में सनातन धर्म स्वीकार करने के बाद शहजाद से शंकर बने युवक का उनके पैतृक गांव बहेड़ी गुर्जर पहुंचने पर ग्रामीणों द्वारा भव्य स्वागत किया गया। गांव में प्रवेश करते ही ढोल-नगाड़ों, पुष्पवर्षा, माल्यार्पण और तिलक लगाकर उनका अभिनंदन हुआ। उनके गुरु धर्माचार्य अरुण कृष्ण महाराज, उनकी पत्नी, बच्चे तथा परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे। दरअसल, 21 अप्रैल को हरिद्वार में शहजाद ने अपने परिवार समेतत पवित्र गंगा में स्नान किया और सनातन धर्म की विधि-विधान अनुसार धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हुए धर्म परिवर्तन किया। सनातन परंपरा के अनुसार, पूजा-अर्चना, वैदिक मंत्रोच्चार, संकल्प, धार्मिक संस्कार और आचार्यों के सान्निध्य में उन्होंने सनातन धर्म स्वीकार किया। इसके उपरांत उनका नया नाम शंकर रखा गया। धर्म परिवर्तन के बाद पहली बार पैतृक गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने उनका जोरदार स्वागत किया। गांव पहुंचने के बाद शंकर सबसे पहले स्थानीय मंदिर गए, जहां उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और गांव के बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया। इसके बाद गांव की महिलाओं और ग्रामीणों ने फूल-मालाएं पहनाकर, तिलक लगाकर तथा शुभकामनाएं देकर उनका अभिनंदन किया। पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों का कहना है कि शंकर बचपन से ही हिंदू धार्मिक परंपराओं और सनातन संस्कृति के प्रति विशेष आस्था रखते था। वो अक्सर धार्मिक स्थलों पर जाते थे, विभिन्न धार्मिक आयोजनों में भी भाग लेते थे। उनके इस निर्णय का गांव में बड़ी संख्या में लोगों ने स्वागत किया है। पढ़िए…क्या बोला शहजाद उर्फ शंकर शहजाद उर्फ शंकर ने कहा-मैं सनातन धर्म को ही मानता था और ऐसे कट्टरवाद इस्लाम से परेशान होकर मैं सनातन धर्म में आया। जैसे कि जीव हत्या करते हैं, आतंकवाद सिखाते हैं मदरसे, ऐसी ट्रेनिंग देते हैं बच्चों को। उनकी मन की विचारधारा बहुत गलत थी। लोगों को जो सिखाते थे, उससे मैं बहुत परेशान था। सनातन धर्म में आने के बाद मुझे बहुत अच्छा लगा। मैं गुरु धर्माचार्य अरुण कृष्ण महाराज से जुड़ा। उनका आशीर्वाद मिला मुझे और मैंने सनातन धर्म में घर वापसी की। उसने कहा-भारत देश हिंदुओं का देश है, सनातनियों का देश है। यहां पहले कोई मुसलमान नहीं था। ये भारत है, यहां अरब से लुटेरे आए। उस समय आकर यहां हमारी बहन-बेटियों के साथ, हमारे बुजुर्गों के साथ जबरदस्ती की। उन्होंने धर्म परिवर्तन करवाए। अब इस सरकार में, गुरु योगी आदित्यनाथ की सरकार में मेरा साहस बढ़ा है। मैंने इतना साहस जुटा पाया कि पहले मैं धर्म के काम पहले भी करता था, यात्राएं भी करता था, लेकिन मैं छुप-छुप कर करता था। मुझे डर रहता था कि मुल्ला न देख लें। मेरे खिलाफ फतवे जारी करते थे। शंकर ने कहा-अब सीएम योगी की यूपी में सरकार है, अब मैं अपना दिल साफ करके, बेधड़क होकर सनातन धर्म में आया हूं। उसने कहा-मैं सभी से कहता हूं कि योगी आदित्यनाथ का साथ दें, उनका सहयोग करें, तभी सनातन धर्म बच सकेगा। मेरे साथ मेरा बच्चा और मेरी पत्नी है। उसने कहा-जहां तक रिश्तेदारों का सवाल है, मेरा किसी से कोई संपर्क नहीं है जो इस्लाम मजहब को मानता है। चाहे वो मेरे पहले घर का हो या बाहर का कोई भी व्यक्ति हो, मैंने सबका त्याग कर दिया है। मुझे अब किसी से कोई संपर्क नहीं चाहिए। न मैं उनसे मिलना चाहता हूं और न ही मेरा उनसे कोई कॉन्टैक्ट है। उसने कहा-सनातन धर्म में आने के बाद मुझे बहुत अच्छा लगा। मैं अपने गुरुदेव धर्माचार्य अरुण कृष्ण महाराज से जुड़ा। उनका आशीर्वाद मिला मुझे और मैंने सनातन धर्म में घर वापसी की। शंकर ने बताया कि वह पहले भी धार्मिक यात्राएं और पूजा-पाठ से जुड़े कार्यक्रम करते थे, लेकिन उन्हें यह सब छिपकर करना पड़ता था। उसने कहा-मैं धर्म के काम पहले भी करता था, यात्राएं भी करता था, लेकिन मैं छुप-छुप कर करता था। मुझे डर रहता था कि मुल्ला न देख लें। मेरे खिलाफ फतवे जारी करते थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में उन्हें किसी प्रकार का भय नहीं है और अब वह अपने परिवार के साथ खुले रूप से अपनी धार्मिक आस्था का पालन कर रहे हैं। उनके अनुसार, धर्म परिवर्तन का निर्णय उन्होंने अपनी व्यक्तिगत आस्था और विश्वास के आधार पर लिया है। उनके गुरु धर्माचार्य अरुण कृष्ण महाराज ने कहा कि वहीं, उनके गुरु धर्माचार्य अरुण कृष्ण महाराज ने कहा कि शहजाद और उनका परिवार सनातन धर्म में घर वापसी कर चुके हैं और अब हम इन्हें शंकर नाम से जानते हैं। मेरा मानना है कि भारत की संस्कृति और सभ्यता की जड़ें सनातन धर्म में निहित हैं। उन्होंने कहा-इतिहास में विभिन्न कारणों से, चाहे वह भय रहा हो, सामाजिक परिस्थितियां रही हों या अन्य कारण, अनेक लोगों ने अपने मूल धर्म से दूरी बना ली। जब किसी व्यक्ति को अपने पूर्वजों और अपनी सांस्कृतिक पहचान का बोध होता है तो वह स्वाभाविक रूप से अपनी जड़ों की ओर लौटता है। शंकर और उनके परिवार ने भी इसी भावना के साथ सनातन धर्म को स्वीकार किया है। हमारा उद्देश्य किसी के प्रति वैमनस्य फैलाना नहीं, बल्कि लोगों को उनकी सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ना है।
Source link
सहारनपुर शहजाद बना शंकर…पत्नी-बच्चे के साथ घर वापसी:शंकर बोला-कट्टरवाद से परेशान होकर सनातन धर्म में आया, अब बेधड़क अपनी आस्था का पालन करुंगा