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सिर्फ हाईवे नहीं, यूपी की तरक्की का इंजन है गंगा एक्सप्रेस-वे, कई धार्मिक स्थल होंगे कनेक्ट, तीर्थयात्रियों के लिए अब ‘सफर’ होगा सुहाना
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आप भी तो नहीं करने जा रहे धान रोपाई में गलती? छोटी पौध बचाने का ये आखिरी मौका


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आप भी तो नहीं करने जा रहे धान रोपाई में गलती? छोटी पौध बचाने का ये आखिरी मौका

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Paddy Farming : धान की रोपाई का समय नजदीक है, लेकिन कई किसानों की नर्सरी में पौध छोटी रह गई है. अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं, तो घबराएं नहीं. लोकल 18 से शाहजहांपुर कृषि एक्सपर्ट डॉ. एनपी गुप्ता बताते हैं कि सही समय पर यूरिया, जिंक सल्फेट का संतुलित इस्तेमाल और रोपाई के दौरान कुछ खास वैज्ञानिक सावधानियां अपनाकर आप न सिर्फ पौधों की रुकी हुई बढ़त को तेज कर सकते हैं. अगर धान की पौध समय पर नहीं बढ़ी है, तो रोपाई से ठीक 4-5 दिन पहले नर्सरी में नाइट्रोजन की खुराक देना बेहद जरूरी है. यूरिया के साथ जिंक सल्फेट का मिश्रण छोटी पौध के लिए संजीवनी बूटी है.

कृषि एक्सपर्ट डॉ. एनपी गुप्ता के मुताबिक, अगर धान की पौध समय पर नहीं बढ़ी है, तो रोपाई से ठीक 4-5 दिन पहले नर्सरी में नाइट्रोजन की खुराक देना बेहद जरूरी है. इसके लिए प्रति एकड़ नर्सरी के हिसाब से हल्की मात्रा में यूरिया का छिड़काव करें. यूरिया पौधों को तुरंत ऊर्जा देता है, जिससे उनकी कोशिकाओं का विभाजन तेजी से होता है. यह उपाय रुकी हुई ग्रोथ को अचानक बूस्ट देता है, जिससे पौधे रोपाई के योग्य हो जाते हैं.

यूरिया के साथ जिंक सल्फेट का मिश्रण छोटी पौध के लिए संजीवनी बूटी की तरह काम करता है. जिंक की कमी से अक्सर धान के पौधे बौने रह जाते हैं और उनकी पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं. रोपाई से कुछ दिन पहले जिंक सल्फेट देने से पौधों में क्लोरोफिल तेजी से बनने लगता है. इससे न केवल पौधों की लंबाई बढ़ती है, बल्कि वे गहरे हरे और मजबूत बनते हैं.

डॉ. गुप्ता बताते हैं कि अक्सर किसान छोटी पौध को मुख्य खेत में बहुत गहराई पर रोप देते हैं, जो कि एक बड़ी गलती है. कम उम्र या छोटी पौध की जड़ें नाजुक होती हैं. अगर इन्हें 2 से 3 सेंटीमीटर से अधिक गहराई पर लगाया जाए, तो पौधों को ऑक्सीजन नहीं मिलती और वे सड़ने लगते हैं. छोटी पौध को हमेशा कम गहराई पर ही रोपना चाहिए ताकि वो जल्दी स्थापित हो सकें.

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धान की शुरुआती रोपाई के समय मुख्य खेत में पानी का प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण होता है. छोटी पौध वाले खेत में कभी भी गहरा पानी न लगाएं. शुरुआत में सिर्फ उतना ही पानी रखें जिससे खेत में नमी बनी रहे या हल्का कीचड़ रहे. ज्यादा पानी होने से छोटे पौधे डूब जाते हैं, उनकी सांस रुक जाती है और वे पीले पड़कर मरने लगते हैं.

उथली रोपाई और कम पानी का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि पौधों की जड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त हवा और धूप मिलती है. इस अनुकूल माहौल के कारण धान के पौधों में कल्ले बहुत तेजी से और अधिक संख्या में फूटते हैं. जितने ज्यादा और मजबूत कल्ले शुरुआती दिनों में निकलेंगे, आगे चलकर फसल में बालियां भी उतनी ही घनी और शानदार आएंगी.

नर्सरी में उपचार के अलावा मुख्य खेत की तैयारी के समय बेसल डोज देना न भूलें. खेत की आखिरी जुताई के दौरान नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश (NPK) की अनुशंसित मात्रा जरूर डालें. यह संतुलित खाद छोटी पौध को नए खेत की मिट्टी में तुरंत जड़ पकड़ने और पोषक तत्वों को सोखने में मदद करती है, जिससे रोपाई के बाद का शॉक कम हो जाता है.

छोटी पौध वाले खेतों में खरपतवारों का प्रकोप फसल को बुरी तरह बर्बाद कर सकता है. चूंकि पौधे अभी छोटे हैं, इसलिए खरपतवार उनसे धूप, पानी और खाद छीन लेते हैं. रोपाई के तुरंत बाद उचित और सुरक्षित खरपतवार नाशक का प्रयोग करें या शुरुआती 20-25 दिनों में निराई-गुड़ाई सुनिश्चित करें. साफ खेत मिलने से कमजोर पौध भी बहुत जल्दी रफ्तार पकड़ लेती है.

एक बार जब छोटी पौध मुख्य खेत में जड़ पकड़ ले, तो समय-समय पर कीटों और बीमारियों की निगरानी करते रहें. शुरुआती 30 दिन फसल के भविष्य को तय करते हैं. अगर आप पानी, खाद और सही दूरी का ध्यान रखते हैं, तो छोटी पौध भी बड़ी और स्वस्थ फसल में बदल जाएगी. यही सही प्रबंधन अंत में आपकी फसल की बंपर पैदावार और मुनाफा सुनिश्चित करता है.



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