महोबा में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले ग्राम विकास अधिकारी (VDO) राहुल पाठक के खिलाफ शनिवार देर शाम अदालत के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने मध्य प्रदेश का निवासी होते हुए भी महोबा में अपने मामा के घर का फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाकर उत्तर प्रदेश में नौकरी प्राप्त की। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के निर्देश पर पनवाड़ी थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस कार्रवाई से विभाग में हड़कंप मच गया है। राहुल पाठक चरखारी में ग्राम विकास अधिकारी के पद पर तैनात हैं। यह कानूनी लड़ाई समाजसेवी ओमकार ने लड़ी है। वादी ओमकार ने अदालत में दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ यह साबित किया कि राहुल पाठक मूल रूप से मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के लारौन गांव के निवासी हैं। राहुल पाठक की प्राथमिक से लेकर स्नातक तक की शिक्षा मध्य प्रदेश में हुई है। वह वहां वन रक्षक के पद पर भी कार्यरत रहे और वहां के पंजीकृत मतदाता भी थे। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी का लाभ लेने के लिए उन्होंने महोबा जिले के सतारी गांव में स्थित अपने मामा के घर का सहारा लिया। आरोपी ने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर सतारी से फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाया और परिवार रजिस्टर में भी गलत तरीके से अपना नाम दर्ज करवा लिया। इतना ही नहीं, उनके पिता की मृत्यु के बाद मध्य प्रदेश की पैतृक भूमि की वरासत में भी उनका पता मध्य प्रदेश का ही दर्ज था। वादी के वरिष्ठ अधिवक्ता दुर्गा प्रसाद लोधी की दलीलों और टीकमगढ़ व महोबा के दोनों विरोधाभासी निवास प्रमाण पत्रों, मतदाता पत्र तथा जांच आख्याओं को देखने के बाद विद्वान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नदीम अनवर की अदालत ने यह सख्त आदेश जारी किया। इससे पहले, निचली अदालत से यह प्रार्थना पत्र खारिज हो चुका था। मुकदमा दर्ज होने के बाद वादी ओमकार का कहना है कि अभी सिर्फ आधा न्याय मिला है, जब तक भ्रष्ट सचिव जेल नहीं जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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महोबा में फर्जी दस्तावेजों से नौकरी पाई:ग्राम विकास अधिकारी राहुल पाठक पर कोर्ट के आदेश से मुकदमा दर्ज