चंदौली: जिले के सकलडीहा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम रेवसा, पचफेड़वा, सोनकर बस्ती, बसरतिया और आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने वर्षों से उपेक्षित सड़क एवं नाली निर्माण की मांग को लेकर आवाज बुलंद कर दी है. ग्रामीणों का आरोप है कि करीब 2.5 किलोमीटर लंबा कच्चा मार्ग पिछले डेढ़ वर्ष से निर्माण की प्रतीक्षा कर रहा है, जबकि इसी मार्ग से प्रतिदिन 2 हजार से अधिक ग्रामीण, किसान, छात्र-छात्राएं, महिलाएं और बुजुर्ग आवागमन करते हैं.
दरअसल, बरसात के दिनों में सड़क पर जलभराव और कीचड़ के कारण स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जिससे लोगों का निकलना मुश्किल हो जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क रेवसा पश्चिम से घूस खास तक जाती है और कई गांवों को आपस में जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है. इसके बावजूद अब तक सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो सका है. लोगों का आरोप है कि कई बार ग्राम पंचायत, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला.
आने-जाने में होती है परेशानी
स्थानीय निवासी सूरज कुमार ने लोकल 18 से बताया कि यह सड़क कई वर्षों से कच्ची पड़ी हुई है. उन्होंने कहा कि बरसात के समय पूरा रास्ता पानी से भर जाता है, जिससे लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. स्कूल जाने वाले बच्चों को भी इसी मार्ग से होकर गुजरना पड़ता है, लेकिन जलभराव और कीचड़ के कारण कई बार वे समय पर विद्यालय नहीं पहुंच पाते. उन्होंने यह भी बताया कि गांव में नालियों की समुचित व्यवस्था नहीं होने से घरों का पानी सड़क पर फैल जाता है. ग्रामीणों ने कई बार प्रधान से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. सूरज कुमार ने शासन और जिलाधिकारी से सड़क निर्माण और नाली व्यवस्था को जल्द दुरुस्त कराने की मांग की.
2 हजार लोग करते है आवागमन
वहीं, अमरीश कुमार ने लोकल 18 से बताया कि वर्ष 2023 से अब तक यह सड़क निर्माण की प्रतीक्षा में है. उन्होंने कहा कि इस मार्ग से प्रतिदिन 2 हजार से अधिक लोगों का आवागमन होता है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई गंभीर पहल नहीं की गई. ग्रामीणों को कभी बजट की कमी, तो कभी प्रस्ताव लंबित होने का हवाला देकर टाल दिया जाता है. उन्होंने कहा कि गर्मियों में किसी तरह लोग आवाजाही कर लेते हैं, लेकिन बरसात शुरू होते ही सड़क चलने लायक नहीं रह जाती, ऐसी स्थिति में मरीजों, बुजुर्गों और आपातकालीन सेवाओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. कई बार एंबुलेंस तक गांव तक नहीं पहुंच पाती. अमरीश कुमार ने दावा किया कि खराब सड़क के कारण कई लोग गिरकर घायल हो चुके हैं और उनका स्वयं का हाथ भी दुर्घटना में टूट चुका है. उन्होंने प्रशासन से सड़क का जल्द सर्वे कराकर निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की.
बीमारियों का बढ़ जाता है खतरा
ग्रामीणों की चिंता केवल सड़क तक सीमित नहीं है. वहीं, संतोष कुमार ने लोकल 18 से बताया कि गांव में नाली और रास्ते की समस्या एक गंभीर मुद्दा बन चुकी है. बरसात के दौरान नालियों का पानी सड़क पर भर जाता है और धीरे-धीरे घरों में भी घुसने लगता है. इससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. उन्होंने कहा कि हर वर्ष बरसात के मौसम में लगभग 50 से 60 लोगों को विभिन्न बीमारियों के कारण अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है. बच्चों और महिलाओं पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है. सड़क की बदहाल स्थिति के कारण बच्चे स्कूल जाते समय कई बार फिसलकर गिर जाते हैं और ग्रामीणों को दैनिक कार्यों के लिए भी भारी परेशानी झेलनी पड़ती है.
जमीनी स्तर पर शुरू नहीं हुआ काम
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार सरकारी कार्यालयों का चक्कर लगाया. ग्राम प्रधान से लेकर क्षेत्रीय विधायक प्रभु नारायण यादव तक अपनी बात पहुंचाई, लेकिन समाधान नहीं निकल सका. लोगों का आरोप है कि हर बार उन्हें केवल आश्वासन दिया गया, जबकि जमीनी स्तर पर कोई काम शुरू नहीं हुआ. अब बरसात का मौसम नजदीक आने के साथ ही ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है. गांव के लोगों ने जिलाधिकारी और शासन से मांग की है कि सड़क एवं नाली निर्माण के लिए जल्द प्रस्ताव स्वीकृत कराकर कार्य शुरू कराया जाए, ताकि हजारों लोगों को राहत मिल सके और बरसात के दौरान होने वाली समस्याओं से निजात मिल सके. ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निर्माण कार्य नहीं कराया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है.