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सिर्फ हाईवे नहीं, यूपी की तरक्की का इंजन है गंगा एक्सप्रेस-वे, कई धार्मिक स्थल होंगे कनेक्ट, तीर्थयात्रियों के लिए अब ‘सफर’ होगा सुहाना
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Ram Mandir Chori Style | Ram Mandir News 6, 12, 24… 5 लाख की गड्डियों में ₹500-500 के 12 बंडल, मंदिर से बैंक पहुंचने के बीच चलता था खेल; इनसाइड स्टोरी


Style of Theft In Ram Mandir: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दानपात्रों से जुड़ी राशि में हुए महाघोटाले की एक ऐसी सनसनीखेज इनसाइड स्टोरी सामने आई है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. मंदिर परिसर के भीतर सीसीटीवी कैमरों की कड़े पहरे और देश के सबसे बड़े बैंक ‘स्टेट बैंक ऑफ इंडिया’ (SBI) के अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद, ‘6, 12 और 24’ के एक गुप्त सिंडिकेट ने रामभक्तों की आस्था के पैसे पर डाका डाला. मंदिर से लेकर बैंक की तिजोरी तक पहुंचने के बीच यह खेल इतनी चालाकी से खेला जाता था कि किसी को कानों-कान खबर नहीं होती थी.

6, 24 और 12 का वह मायाजाल, जहां गायब होते थे नोट
जांच सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया बेहद त्रि-स्तरीय सुरक्षा में होती थी. इस काउंटिंग रूम में एसबीआई बैंक के 6 वरिष्ठ कर्मचारियों की सीधी निगरानी होती थी. नोटों को गिनने और उनकी गड्डियां बनाने का काम एक निजी संस्था के 24 ट्रेंड कर्मचारियों को सौंपा गया था. इसके बाद असली खेल शुरू होता था. राम मंदिर ट्रस्ट की तरफ से विशेष रूप से नियुक्त किए गए 12 सेवादार कर्मचारी इन बंडलों की अंतिम काउंटिंग करते थे और उन्हें बैंक के बड़े बक्सों (कैश बॉक्स) में रखने की जिम्मेदारी संभालते थे.

सीसीटीवी की आड़ में 5 लाख की गड्डी का खेल
पैसा बक्से में रखते समय ही सबसे बड़ा गबन किया जाता था. गिनती के समय नोट गिनने वाले कर्मचारी जानबूझकर सीसीटीवी कैमरे के सामने खड़े हो जाते थे, ताकि उनके साथी नोटों की गड्डियों से अतिरिक्त नोट निकालकर छिपा सकें. बड़ी चतुराई से 5-5 लाख रुपये के बड़े नोटों के बंडलों में 500-500 रुपये के नोटों के 12 अतिरिक्त बंडल छुपा देते थे. जानबूझकर बड़े नोटों (जैसे कि 500 रुपये के नोट) के बंडलों में किया जाता था. भारी कैश होने के कारण बड़े बंडलों की मोटाई में मामूली हेरफेर आसानी से पकड़ में नहीं आता था. चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे खेल में एसबीआई के करीब 20 बैंक कर्मचारियों के भी अप्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष रूप से शामिल होने की बात सामने आ रही है.

बैंक परिसर में होता था बंदरबांट

मंदिर से कैश बॉक्स बंद होने के बाद ट्रस्ट के मुख्य सेवादार रामशंकर यादव उर्फ टीनू और अविनाश शुक्ला इस पैसे को लेकर एसबीआई बैंक पहुंचते थे. बैंक पहुंचने पर कैश का दोबारा मिलान किया जाता था. लेजर बुक में उसकी आधिकारिक एंट्री दर्ज की जाती थी. लेकिन इस एंट्री के समय ही बैंक परिसर के भीतर ही बचे हुए और छुपाए गए नोटों को आपस में बांट लिया जाता था.

आलीशान मकान और भागवत कथा पर उड़ाए पैसे

एसआईटी और पुलिस की रेड में आरोपियों के पास से अब तक कुल 79 लाख 85 हजार रुपये नगद बरामद किए जा चुके हैं. आरोपियों के पास से जो खुलासे हुए हैं:

अविनाश शुक्ला: मुख्य सेवादार अविनाश के पास से पुलिस ने करीब 20 लाख रुपये कैश बरामद किया है.

मनीष यादव: यह आरोपी मुख्य सेवादार रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू का सगा भतीजा है. इसके पास से 2 लाख रुपये नगद मिले हैं, जबकि पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह करीब 3 लाख रुपये पहले ही ऐश-ओ-आराम में खर्च कर चुका है.

अनुकल्प मिश्रा: इस घोटाले में इसे ही सबसे ज्यादा फायदा हुआ है. अनुकल्प मिश्रा ने अयोध्या के पॉश इलाके कौशलपुरी में करीब 50 लाख रुपये में एक आलीशान मकान खरीदा था. यही नहीं, उसने अपने पैतृक गांव में करीब 15 लाख रुपये से अधिक कैश बरामदगी के अलावा एक बड़ा फार्म हाउस भी खड़ा कर लिया. समाज में अपनी साख बनाने के लिए उसने गांव में एक भागवत कथा का आयोजन भी कराया था, जिसमें राम मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों समेत जिले के कई वीवीआईपी और वरिष्ठ राजनेता शामिल हुए थे.

राम मंदिर दान घोटाले में ‘6, 12 और 24’ का गणित क्या है?
इस खेल में एसबीआई के 6 बैंक कर्मचारियों की निगरानी होती थी, 24 प्राइवेट कर्मचारी नोटों के बंडल बनाते थे, और ट्रस्ट के 12 कर्मचारी बक्सों में पैसे रखते समय गबन को अंजाम देते थे.

बक्से में बंडल रखते समय आरोपी किस प्रकार हेरफेर करते थे?
आरोपी सीसीटीवी कैमरे की आड़ लेकर 5 लाख रुपये के बड़े नोटों के बंडलों के बीच में 500-500 रुपये के 12 बंडल छुपा देते थे, जिससे बड़ी रकम आसानी से गायब हो जाती थी.

मंदिर का पैसा बैंक में जमा कराने और लेजर एंट्री की जिम्मेदारी किनके पास थी?
राम मंदिर ट्रस्ट के सेवादार रामशंकर यादव उर्फ टीनू और अविनाश शुक्ला बैंक में पैसा ले जाते थे, जहां मिलान के बाद लेजर बुक में एंट्री होती थी और फिर बचे पैसे का बंदरबांट होता था.

आरोपी अनुकल्प मिश्रा ने गबन के पैसों का इस्तेमाल कहां-कहां किया था?
अनुकल्प मिश्रा ने अयोध्या के कौशलपुरी में 70 लाख का मकान खरीदा, पैतृक गांव में फार्म हाउस बनाया और एक भव्य भागवत कथा का आयोजन किया जिसमें बड़े नेता और ट्रस्टी शामिल हुए थे.



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