रामपुर में पूर्व मंत्री आजम खां और उनके परिजनों की जौहर ट्रस्ट अपनी अलग सरकार चला रही थी। ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन निरस्त होने के आदेश में इससे जुड़े कई अहम खुलासे हुए हैं। आयकर की जांच में सामने आया है कि जौहर ट्रस्ट सरकार की तरह फैसले ले रही थी। जौहर यूनिवर्सिटी की इमारतों के निर्माण में दूसरी योजनाओं में खर्च होने वाली सरकारी रकम पानी की तरह इस्तेमाल की गई। ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन रद्द होने के बाद अब ईडी भी जौहर यूनिवर्सिटी को जब्त करने की कार्रवाई करने की तैयारी में है।
आयकर विभाग की जांच में विवि के निर्माण में बेशुमार सरकारी धन खर्च किए जाने के सुबूत मिले हैं। ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने आयकर की पूछताछ में भवनों के निर्माण की कुल लागत 46 करोड़ रुपये बताई थी जबकि अधिकारियों से कराए गए सर्वे में लागत 450 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई थी। वहीं आयकर विभाग भी ट्रस्ट से 494 करोड़ रुपये का स्रोत पूछेगा जिसके बाद टैक्स के साथ जुर्माना और ब्याज भी वसूला जाएगा। आयकर विभाग के अधिकारी अभी इसका आकलन कर रहे हैं। ट्रस्ट ने बीते दिसंबर में आयकर विभाग के आरोपों का जवाब भी दिया था, लेकिन वह कोई तथ्यात्मक जानकारी या दस्तावेज नहीं दे सका।
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केवल नाम के ट्रस्टी: जांच में सामने आया कि कई लोग सिर्फ नाम के ट्रस्टी थे। इनमें शामिल चौधरी शहरयार सलीम ने बताया कि वह डमी ट्रस्टी था। उसे जौहर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर के चयन के लिए हुई बैठक में बुलाया गया था और केवल दस्तखत लेकर वापस भेज दिया गया। ट्रस्ट को आजम खान और उनके परिवार के सदस्य ही कंट्रोल और मैनेज करते हैं। यह भी सामने आया कि रामपुर के कई निजी कंस्ट्रक्शन फर्मों को अलग-अलग सरकारी ठेके दिलाए गए और बाद में उससे ट्रस्ट की संपत्तियां बनवाई गईं। जौहर एसोसिएट्स और सीके एसोसिएट्स ने सरकारी अनुबंध से मिली करीब 86 करोड़ रुपये की सरकारी रकम का गलत इस्तेमाल किया। इसका कोई हिसाब-किताब भी नहीं रखा गया।
इन दानकर्ताओं का पता नहीं चला: आयकर जांच में जौहर ट्रस्ट ने जिन लोगों से दान मिलने का दावा किया था, उनका जांच में पता हीं नहीं चला। इनमें लखनऊ की पिरामिड कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स, मुरादाबाद की सालार ओवरसीज लिमिटेड, दिल्ली की एआर एजूकेशन ट्रस्ट, नोएडा की अर्थ इंफ्राटेक, दिल्ली की रेमिगेट इंफ्रा डेवलपर्स, रॉयल इम्पोरिया फ्रा टेक, मुरादाबाद की फैजा परवीन, बहराइच के मोहम्मद हसीब, रोबोट विनिमय प्राइवेट लिमिटेड, वंडर सप्लायर्स प्राइवेट लिमिटेड और ड्रीम ऑफ पर्ल रियलिटी एंड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड आदि शामिल हैं।