पूर्वांचल सहित वाराणसी में भीषण गर्मी का दौर जारी है। गुरुवार सुबह शहर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि हवा की रफ्तार 6 किलोमीटर प्रति घंटा और आर्द्रता (नमी) 40 प्रतिशत रही। मौसम विभाग के अनुसार गर्मी का यह प्रकोप अधिकतम 28 जून तक जारी रह सकता है। इसके बाद 29 और 30 जून को तड़ित झंझावात (थंडरस्टॉर्म) के प्रभाव से आंधी और बारिश होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 2 जुलाई के आसपास मानसूनी बादलों के पूर्वांचल में पहुंचने की संभावना है। इसके बाद 3 से 6 जुलाई के बीच वाराणसी समेत पूरे पूर्वांचल क्षेत्र में अच्छी बारिश हो सकती है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। जून में 87 फीसदी कम हुई बारिश मौसम विशेषज्ञ प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव के अनुसार बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) समय पर सक्रिय नहीं हो पाया, जिसके कारण उत्तर-पूर्वी मानसून को आगे बढ़ने के लिए अपेक्षित ताकत नहीं मिल सकी। हालांकि राहत की बात यह है कि उत्तर-पूर्वी मानसून उत्तरी बिहार तक पहुंच चुका है और वर्तमान गति को देखते हुए अगले तीन से चार दिनों में पूर्वांचल में दस्तक दे सकता है। आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 24 जून के बीच वाराणसी में सामान्यतः 51.8 मिमी वर्षा होनी चाहिए थी, लेकिन इस अवधि में केवल 6.8 मिमी बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य से लगभग 87 प्रतिशत कम है। पिछले सात वर्षों के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो मानसून चार बार समय पर या समय से पहले पहुंचा, जबकि तीन बार देरी से आया। वर्ष 2021 में मानसून ने सबसे पहले 13 जून को दस्तक दी थी, जबकि 2024 में सबसे देर से 28 जून को पहुंचा था। चिड़ियाघर के बेजुबान जानवर भी गर्मी से बेहाल भीषण गर्मी का असर सारनाथ स्थित चिड़ियाघर और डियर पार्क के जानवरों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। बढ़ते तापमान को देखते हुए जू प्रशासन ने जानवरों के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। उनके लिए पर्याप्त जल व्यवस्था और ठंडे खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराए जा रहे हैं। गर्मी के कारण मगरमच्छ और घड़ियाल अधिकांश समय पानी के भीतर ही रह रहे हैं, जिससे उन्हें देखने आने वाले पर्यटकों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। जू प्रशासन ने एहतियात के तौर पर परिसर के विभिन्न हिस्सों में नियमित पानी का छिड़काव और साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित की है। जानवरों को दिया जा रहा विशेष आहार जू के कर्मचारी बबन यादव ने बताया कि जानवरों के लिए टीनशेड के आसपास लगातार पानी का छिड़काव किया जा रहा है ताकि तापमान नियंत्रित रहे। पक्षियों के बाड़ों को तीन तरफ से हरे रंग के पर्दों से ढक दिया गया है। वहीं उनके भोजन में पालक, खीरा, ककड़ी, भीगा हुआ चना, केला, गाजर और आलू जैसी पौष्टिक एवं ठंडक देने वाली चीजें शामिल की गई हैं।
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वाराणसी में 72 घंटे बाद तेज बारिश का अलर्ट:मौसम वैज्ञानिक बोले- जून में 87% कम हुई बारिश, चिड़ियाघर में जानवरों के भोजन में किया गया है बदलाव