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नोएडा में यमुना और गंगा एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाले इंटरचेंज के बनने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों की कनेक्टिविटी राष्ट्रीय राजमार्गों से और मजबूत होगी. खासतौर पर दिल्ली, आगरा, ग्वालियर और मुंबई जाने वाले भारी वाहनों को अब शहर के अंदर से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा, जिससे ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा. इसके साथ ही एक्सप्रेसवे पर लगने वाले जाम की समस्या में भी राहत मिलेगी. प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि यमुना एक्सप्रेसवे को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ना लंबे समय से लंबित मांग थी और अब इसके लिए बजट भी स्वीकृत हो चुका है.
गंगा एक्सप्रेस वे इंटरचेंज, नोएडा
गेटर नोएडाः नोएडा से यमुना एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाले बहुप्रतीक्षित इंटरचेंज प्रोजेक्ट के लिए अब जमीन खरीद की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. प्राधिकरण ने तय किया है कि मथुरा जिले के महेंद्रपुर बागर और भदौर गांव की जमीन इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित की जाएगी. यमुना एक्सप्रेसवे पर करीब 24.8 किलोमीटर के बिंदु पर इस इंटरचेंज का निर्माण किया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को यमुना और गंगा एक्सप्रेसवे से सीधा जोड़ना है.
1209 करोड़ से बनकर होगा तैयार
अधिकारियों के अनुसार इस लिंक रोड की कुल लंबाई लगभग 130 मीटर होगी और इस पर अनुमानित 1209 करोड़ रुपये की लागत आएगी. इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद नोएडा से आगरा होते हुए ग्वालियर और वहां से सीधे मुंबई तक जाने वाले वाहनों को एक नया और तेज मार्ग उपलब्ध हो जाएगा, जिससे यात्रा का समय भी काफी कम होगा और ईंधन की बचत भी होगी. प्राधिकरण ने बताया कि इंटरचेंज के निर्माण के लिए किसानों से उनकी जमीन बाजार भाव पर खरीदी जाएगी और मुआवजे की प्रक्रिया को पारदर्शी रखा जाएगा. अभी महेंद्रपुर बागर और भदौर गांव में जमीन की पहचान और सर्वे का काम शुरू हो चुका है, जिसके बाद अधिग्रहण से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी. कुल 73.4 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेस वे बनकर तैयार होगा.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों की कनेक्टिविटी होगी मजबूत
अधिकारियों का कहना है कि इस इंटरचेंज के बनने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों की कनेक्टिविटी राष्ट्रीय राजमार्गों से और मजबूत होगी. खासतौर पर दिल्ली, आगरा, ग्वालियर और मुंबई जाने वाले भारी वाहनों को अब शहर के अंदर से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा, जिससे ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा. इसके साथ ही एक्सप्रेसवे पर लगने वाले जाम की समस्या में भी राहत मिलेगी. प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि यमुना एक्सप्रेसवे को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ना लंबे समय से लंबित मांग थी और अब इसके लिए बजट भी स्वीकृत हो चुका है.
निर्माण एजेंसी का चयन जल्द किया जाएगा और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा. स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने इस फैसले का स्वागत किया है क्योंकि इससे क्षेत्र में विकास की गति तेज होगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. कुल मिलाकर यह इंटरचेंज न सिर्फ परिवहन को सुगम बनाएगा बल्कि पूरे बुंदेलखंड और पश्चिमी यूपी के आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका निभाएगा.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें