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Horror Tree Sultanpur : हमारे आसपास अक्सर ऐसे पेड़ मिल ही जाते हैं, जिन्हें देखकर डर लगाने लगता है. एक अनजान खौफ मन में बैठ जाता है. उनसे जुड़ी कई तरह की कहानियां सुनने को मिलती हैं. आज बात करेंगे यूपी के सुल्तानपुर में मौजूद ऐसे ही पांच पेड़ों के बारे में, जिनके आसपास रात छोड़ो जल्दी दिन में भी कोई नहीं जाता. ये अपनी बनावट और आकर की वजह से भी डरावने लगते हैं. गांव के लोगों के मुताबिक, इनमें से एक पेड़ अपने जीवन काल में दो से तीन बार सूख चुका है, लेकिन फिर हरा-भरा हो उठता है. सुलतानपुर के देवरहर गांव स्थित बरगद का पेड़ तो मकड़ी के आकार का है.
सुल्तानपुर शहर मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर दूर कादीपुर इलाके के खंडौरा गांव में स्थित बरगद का यह पेड़ काफी डरावना है. इसकी बनावट से रात में लोग डर जाते हैं. गांव के लोगों के मुताबिक, यह पेड़ अपने जीवन काल में दो से तीन बार सूख चुका है लेकिन डीह माता के आशीर्वाद से पुन: यह पेड़ हरा भरा हो जाता है. इस पेड़ की आकृति काफी डरावनी सी है. इसकी शाखाएं एक दूसरे के ऊपर चढ़ी हुई हैं.

अगर आप भी इस अद्भुत बरगद के पेड़ और डीह माता का आशीर्वाद लेना चाहते हैं तो सुल्तानपुर से लगभग 60 किलोमीटर दूर कादीपुर विधानसभा के खंडौरा ग्राम पंचायत में आना होगा. खंडौरा ग्राम पंचायत के लेड़ुवा गांव में यह बरगद का अदभुत पेड़ आपको देखने को मिल जाएगा. यहां पर दीपावली के दिन मेले का भी आयोजन किया जाता है.

सुलतानपुर के देवरहर गांव स्थित बरगद का यह पेड़ मकड़ी के आकार का है. जिसकी शाखाएं पेड़ को चारों तरफ से बांध कर रखी हैं. ऐसा लगता है जैसे कई सांप आपस में हठखेलियां कर रहे हैं. बाबा महेश नाथ धाम क्योंकि एक प्रसिद्ध और आध्यात्मिक मान्यताओं वाला धाम है यहां पर मौजूद यह बरगद का पेड़ काफी डरावना है क्योंकि इसके बनावट और आकृति लोगों को रात में डरा देती है.
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इस पेड़ की आकृति कुछ ऐसी है कि यहां पर यदि आप रात में चले जाएं तो आपको डर लग सकता है. बड़ी-बड़ी टहनियां, पेड़ की कई शाखाएं और पेड़ से निकलते लटकन, ऐसा लगता है जैसे सांप यहां पर लोट रहे हैं. कुछ वर्ष पहले तक तो यहां भी मान्यता थी कि जो भी इस बरगद के पेड़ से पत्ते या फिर टहनियां तोड़ता था, उसको कोई न कोई नुकसान जरूर होता था.

स्थानीय निवासी अशोक कुमार सिंह बताते हैं कि यह पेड़ काफी पुराना है. यहां पर जब भुरुचों का कबीला हुआ करता था तब से यह पेड़ माना जाता है. हालांकि कुछ लोग इसे 400-500 साल पुराना ही मानते हैं. यह पेड़ न सिर्फ आकार में डरावना है बल्कि ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी काफी महत्वपूर्ण है.

कई लोगों का कहना है कि उन्होंने यहां पर अजीब रोशनी और रहस्यमयी आवाजें महसूस की हैं. विजय बहादुर सिंह बताते हैं कि बाबा अपने भक्तों को दर्शन देकर उनकी समस्याओं को दूर करते हैं, हालांकि इस घटना को देखने का दावा बहुत कम लोग करते हैं. यहां पर मौजूद बरगद का पेड़ लगभग एक बीघा में फैला हुआ है स्थानीय लोग बताते हैं कि इसकी कई शाखाएं अलग-अलग जगह पर जाकर अपने आप निकली हैं और पेड़ का आकार ले ली है यहां पर भी लोग जाने से डरते हैं.

पहलवान वीर बाबा के मंदिर के पास स्थित यह बरगद का पेड़ लोगों के लिए आकर्षण और डर दोनों का कारण है. इसकी शाखाएं और फैली हुई शाखाएं रात के समय बेहद भयावह दिखाई देती हैं. लोग पहले यहां आने से लोग डरते थे क्योंकि पेड़ के आसपास अजीब आवाजें सुनाई देती थीं. इस पेड़ का फैलाव लगभग एक बीघा क्षेत्र में है

गांव के लोगों के मुताबिक, यह पेड़ से जुड़ी कई रहस्मयी कहानियां सुनने को मिलती हैं. अकेले यहां लोग जाने से बचते हैं. बच्चों को भी जाने से रोकते हैं. यह पेड़ गांव के बाहर है. इसकी शाखाएं डरावनी आकार में लिपटी हुई हैं. कहते हैं कि ये पेड़ कई सौ साल पुराना है.