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उत्तर प्रदेश के मऊ जिले की पारंपरिक ‘खजुली’ अपने खस्ता स्वाद और गुड़ की प्राकृतिक मिठास के लिए प्रसिद्ध है. चने के बेसन, गुड़ और सफेद तिल से तैयार यह मिठाई लंबे समय तक सुरक्षित रहती है और इसकी मांग मऊ से लेकर देश के कई शहरों तक बनी हुई है.
उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद में एक अलग ही प्रकार की खुजली बनाई जाती है. इसे खाने के लिए लोग दूर-दूर से लोग पहुँच जाते हैं इस खजुली की खासियत यह है कि इस खजुली को शुगर के मरीज भी आसानी से खा लेते हैं. एक बार इस खजुली को यदि कोई खा लेता है तो वह बार-बार खाने पर मजबूर हो जाता है. क्योंकि यह खुजली सिर्फ चना के बेसन और गुड़ की बनाई जाती है आईए जानते हैं क्या है इसकी पूरी खासियत.

मऊ जनपद के मुहम्मदाबाद गोहना में मनोज लट्ठा व खुजली के दुकान की फेमस है यह खजुली. इस खजौली की खासियत यह है की खस्ता के साथ यह मीठा होती है और काफी कुरकुरी होती है. इस वजह से लोग इसे खाने में काफी पसंद करते हैं और कई दिनों तक यह खराब नहीं होती है जिससे लोग इसे घर भी अपने ले जाकर रखते हैं. क्योंकि कई दिनों तक यह खजुली खराब नहीं होती है.

मनोज बताते हैं कि उनके यहां घर पर यह खुजली बनाई जाती है और उसके बाद से वाहन से सिर्फ एक जगह रोक कर इस खजुली को बेची जाती है. सुबह से शाम तक लगभग एक कुंतल से अधिक यह खजुली को बेच देते हैं. अगर बात करें कीमत की तो यह 240 रुपए किलो मिलती है. लेकिन स्वाद ऐसा होता है कि हर किसी के मन को भा जाता है. यही वजह है कि इसकी मार्केट में मांग अधिक बनी हुई है.
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इस खजुली की बनाने की यदि विधि की बात करें तो यह खुजली सिर्फ चना के बेसन, गुड़ और सफेद तिल डालकर बनाया जाता है. मात्र तीन खाद्य पदार्थों को डालकर यह बनाया जाता है जिसकी वजह से इसका स्वाद काफी बेहतर होता है और कई दिनों तक यह खराब नहीं होता है. यही वजह है कि हर कोई इसे काफी पसंद करता है लोग इसे खाने से अधिक अपने घर पैक करा कर लेकर जाते हैं.

इस खुजली को बनाने के लिए सबसे पहले चना के बेसन को गुथा जाता है और उसके बाद उसे लोई का आकार बनाकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर उसे लंबे आकार का खजुली का रूप दिया जाता है. फिर उसे रिफाइन में छान कर बाहर निकाल दिया जाता है जब वह ठंडा हो जाता है तो उसके बाद गुड़ का बनाया गया चासनी में तब तक डालकर उसे छोड़ दिया जाता है जब तक वह चासनी को अच्छे से सोख नहीं लेता है.

जब खजुली चासनी को सुख लेता है तो उसे बाहर निकलते समय ऊपर से सफेद तीली को छिड़क दिया जाता है. जिससे वह पूरी तरह से खजुली में समा जाता है और इस खुजली का स्वाद बढ़ा देता है. खाने में काफी खस्ता और मीठा यह खुजली हर किसी को काफी पसंद आता है. लोग इसे खाने से ज्यादा घर लेकर जाते हैं क्योंकि कई दिनों तक यह खजुली खराब नहीं होने वाली एक मिठाई होती है.

इस खजुली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि शुगर के मरीज भी इसे खा लेते हैं क्योंकि गुड और चना का बेसन का बना हुआ यह खजूली सूगर के मरीजों को भी नुकसान नहीं करती है. यही वजह है कि हर कोई से काफी पसंद करता है इस खजुली को खाकर पानी पीने में बहुत ही आनंद आता है इस वजह से लोग से घर मेहमानों को भी खाने के लिए देते हैं मऊ में यह एक अलग ही तरीके से बनाई जाती है और उसकी मांग बहुत अधिक है.

अगर बात करें इस मऊ की खुजली की तो इसके मांग सिर्फ मऊ और आजमगढ़ ही नहीं बल्कि लोग से पैक करा कर दिल्ली, मुंबई और विदेशों तक लेकर जाते हैं. क्योंकि कई दिनों तक यह खराब नहीं होती और सुबह खाकर पानी पीने में बहुत ही आनंद आता है इस वजह से लोग इसे लेकर दूर-दूर तक जाते हैं. इसकी मांग मऊ से लेकर विदेश तक है इस वजह से सुबह यह बनाई जाती है और शाम तक आसानी से समाप्त हो जाती है.