मेरठ के मौलाना मशहूदुर्रहमान शाहीन जमाली चतुर्वेदी ने संबोधित करते हुए कहा कि अल्लाह के नेक बंदों के लिए हज एक महान कर्तव्य है, जिसे अल्लाह ने पूरी इस्लामी दुनिया पर लागू किया है. इसकी अदायगी पवित्र नगरी मक्का की पाक सरजमीन पर की जाती है. दुनिया भर से लाखों लोग हर साल ‘लब्बईक अल्लाहुम्मा लब्बईक’ अर्थात ‘ऐ अल्लाह, हम तेरे दरबार में हाजिर हैं’ का उद्घोष करते हुए हज के लिए पहुंचते हैं.
हज करने वाला व्यक्ति गुनाहों से हो जाता है पाक और साफ
उन्होंने कहा कि हज के दर्शन का ध्यानपूर्वक अध्ययन करने से दो मूल तत्व सामने आते हैं और यही तत्व मानवता के उत्थान के लिए पर्याप्त हैं. पहला तत्व है एकेश्वरवाद, जो विचारों और आचरण दोनों में होना चाहिए. यही वह महान तत्व है, जिससे मनुष्य अपने जीवन का उद्देश्य निर्धारित करता है. दूसरा तत्व है इंसानियत से प्रेम करना और मानवता की सेवा करना. हज करने वाला व्यक्ति गुनाहों से पाक और साफ हो जाता है तथा हज के बाद वह अल्लाह से प्रेम करने वाला और अल्लाह के बंदों से मोहब्बत करने वाला बन जाता है. वह इंसानियत की कद्र करने वाला इंसान बनता है.
उन्होंने कहा कि हज की तारीख हजरत इब्राहिम और उनके बेटे हजरत इस्माईल की जिंदगी से जुड़ी हुई है. यह दोनों ऐसी हस्तियां हैं, जिन्हें मुसलमान अल्लाह का पैगंबर मानते हैं. इसलिए हज ऐसा होना चाहिए, जो इंसान की जिंदगी को बदल दे और उसे अल्लाह और उसके बंदों से प्रेम करना सिखाए.
मुसलमान भाइयों से खुले में कुर्बानी ना करने की अपील
उन्होंने कहा कि ईद-उल-अजहा की कुर्बानी हजरत इब्राहिम की सुन्नत है और इसका असली मतलब गरीबों और मजलूमों की मदद करना है. उन्होंने मुसलमान भाइयों से अपील की कि कुर्बानी खुले में न करें, गंदगी न फैलाएं और सफाई-सुथराई का पूरा ध्यान रखें. साथ ही कोई ऐसा काम न करें, जिससे किसी भाई को तकलीफ पहुंचे. उन्होंने कहा कि अपनी कुर्बानी सिर्फ अल्लाह की रजा के लिए करें, हर मजहब का एहतराम करें और सभी के जज्बात का ख्याल रखें. कोई ऐसा कार्य बिल्कुल न करें, जिससे किसी समुदाय या भाई के जज्बात को ठेस पहुंचे.
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