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Ram Mandir Dan Chori: यूपी में अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही एसआईटी (SIT) के सामने एक कैशियर ने ऐसा खुलासा किया है. करीब दो दशक से ट्रस्ट में कार्यरत इस कैशियर ने बताया कि दान की गिनती की पूरी प्रक्रिया कई स्तर की सुरक्षा और दर्जनों CCTV कैमरों की निगरानी में होती थी. इसके बावजूद कथित तौर पर करोड़ों रुपये की चोरी कैसे होती रही.
राम मंदिर दान चोरी केस.
अयोध्या: यूपी में अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं. अब इस मामले की जांच कर रही एसआईटी (SIT) के सामने दान गिनने वाले एक कैशियर ने बयान दर्ज कराया है. करीब 30 मिनट तक चली पूछताछ में उससे मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था, काउंटिंग सिस्टम, आरोपियों के व्यवहार और पूरे संचालन तंत्र को लेकर विस्तार से सवाल किए गए.
कैशियर ने बताया कि उसकी नियुक्ति वर्ष 2005 में इंटरव्यू के बाद हुई थी और वह रोज़ाना दान में आने वाले नोटों और सिक्कों की गिनती करता था. उसके अनुसार काउंटिंग सेंटर में दो शिफ्टों में काम होता था और वह दूसरी शिफ्ट में ड्यूटी करता था. उसने बताया कि काउंटिंग सेंटर तक पहुंचने से पहले कर्मचारियों को कई चरणों की सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ता था. मुख्य गेट पर पुलिस की तलाशी, हुंडी कार्यालय में दोबारा जांच, उपस्थिति दर्ज कराना, मोबाइल और निजी सामान लॉकर में जमा करना तथा विशेष ड्रेस पहनना अनिवार्य था. इसके बाद SIS सुरक्षा कर्मी पहचान का मिलान करने के बाद ही काउंटिंग रूम में प्रवेश देते थे. पूरी प्रक्रिया CCTV कैमरों में रिकॉर्ड होती थी.
10 CCTV कैमरों की निगरानी में होती थी नोटों की गिनती
कैशियर के मुताबिक दान पात्र छह लोगों की मौजूदगी में खोले जाते थे और करीब 10×12 फीट के काउंटिंग रूम में लगभग 10 CCTV कैमरों की निगरानी में नोटों की गिनती होती थी. यहां ट्रस्ट के अधिकारी, SBI के कर्मचारी, सुपरवाइजर और कैशियर समेत करीब 50 लोग दो शिफ्टों में काम करते थे. नोटों की गिनती के बाद रजिस्टर में एंट्री होती थी और फिर बैंक की गाड़ी कैश लेकर चली जाती थी.
क्यों नहीं हुआ कभी आरोपियों पर शक?
पूछताछ के दौरान कैशियर ने गिरफ्तार आरोपियों के व्यवहार का भी जिक्र किया. उसने बताया कि सभी आरोपी बेहद शांत रहते थे, किसी से ज्यादा बातचीत नहीं करते थे और अपने काम तक ही सीमित रहते थे. इसलिए कभी उन पर शक नहीं हुआ. उसने यह भी बताया कि आरोपी अनुकल्प अक्सर खुद को बड़े ठेकेदार का बेटा बताता था और धार्मिक आयोजनों और राजनीति में रुचि होने की बात करता था.
टीनू यादव का नाम लेने पर मंदिर के कई जगह मिल जाती थी एंट्री
कैशियर ने एक और अहम दावा करते हुए कहा कि गिरफ्तार आरोपी टीनू यादव का नाम लेने पर मंदिर परिसर में कई जगह बिना रोक-टोक आने-जाने की अनुमति मिल जाती थी. हालांकि उसकी ड्यूटी गर्भगृह में होने के कारण उससे रोज़ाना मुलाकात कम होती थी. कैशियर ने जांच के दौरान सिस्टम की एक बड़ी खामी की ओर भी इशारा किया. उसके मुताबिक जिस कर्मचारी की जिम्मेदारी CCTV मॉनिटरिंग रूम में बैठकर काउंटिंग सेंटर की निगरानी करने की थी, वह कई बार अपनी सीट से गायब रहता था. ऐसे में निगरानी व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.
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अभिजीत चौहान, News18 Hindi के डिजिटल विंग में सब-एडिटर हैं. वर्तमान में अभिजीत उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और वायरल ख़बरें कवरेज कर रहे हैं. AAFT कॉलेज से पत्रकारिता की मास्…और पढ़ें